ओवैसी की तरफ से इस युवा का महमूद मदनी को करारा जवाब,कहा मदनी जी लीडर बनिए डीलर नहीं

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अगर आइडेंटिटी पॉलिटिक्स नहीं होती तो मायावती कभी इतने बड़े सूबे की मुख्यमंत्री नहीं बन पाती और न ही बहुजन मूवमेंट इस देश में उभर पाता। अखिलेश यादव से लेकर लालू यादव समाजिक गठजोड़ के तहत सत्ता में आए उसमें भी आइडेंटिटी पॉलिटिक्स को नकार नहीं सकते।

साउथ इंडिया में राजनीति की मुख्य धुरी ही आइडेंटिटी पॉलिटिक्स रही है जहाँ आइडेंटिटी से मुराद भाषा है।
शिवसेना अकाली दल ये सब क्या हैं? ये सब भी तो आइडेंटिटी पॉलिटिक्स करती हैं।

पूरी दुनिया में लोग इस वक़्त अपनी आइडेंटिटी को लेकर लड़ रहे हैं, तमाम लोकतांत्रिक देशों में आइडेंटिटी पॉलिटिक्स इसवक़्त तेज़ी से पैठ बना रही है, क्योंकि अगर काले लोग अपनी आइडेंटिटी का आधार बनाकर राजनैतिक लड़ाई न लड़ते तो ख़ुद को सभ्य कहने वाले उन्हें कभी उनको उनका हक़ न देते। पूरा का पूरा टकराव ही आइडेंटिटी को लेकर है।

भारतीय संदर्भ में देखा जाए तो कभी कांग्रेस और भाजपा नहीं चाहती हैं कि बाक़ी के उपेक्षित समुदाय की आईडेंटिटी पॉलिटिक्स उभरे जबकि ये दोनों खुद दल सबसे बड़ी आइडेंटिटी पॉलिटिक्स करती हैं, इनकी पूरी पॉलिटिक्स ही ब्राह्मणवाद पर टिकी है और इनकी यही आइडेंटिटी है।

बाक़ी रही बात मदनी साहब की तो कल जो इन्होंने आइडेंटिटी पॉलिटिक्स के संदर्भ में बचकाना बयान या जानबूझ कर कहा है, इसपर पूर्णरूप से असहमत हूँ और इनका विरोध करता हूँ। मदनी साहब कोई पैग़म्बर नहीं हैं कि इनकी बातों पर असहमत न हुआ जाए। बहुत से अच्छे काम करते हैं पर जहाँ गलत हैं वहाँ गलत कहिए, बोलिए और खुलकर ऐसी बातों का विरोध कीजिए। बैलेंस मत बनाइए।

मदनी साहब से सवाल पूछिए, नम्बर हो तो काल करके पूछिए कि आख़िर आपको दिक्कत क्या है? ऐसे बयान देने से बेहतर है आप शुद्धरूप से राजनीति में क्यों नहीं आ जाते? लीडर बनिए डीलर नहीं। ठेकेदारी जमाने का दौर चला गया।

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