जीत से पहले ही अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी जारी, बीजेपी काँग्रेस ने मुस्लिम नुमाइंदों को किया नज़रअंदाज़, 230 में से दिये सिर्फ चार टिकट

0
282

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव से पहले पाँच राज्यों में होने वाले चुनाव में तमाम पार्टियाँ ताल ठोक रही हैं लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी बराबर जारी हैं,कॉंग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिया हैं लेकिन मुस्लिम नुमाइंदों को नज़रअंदाज़ किया है।

मध्य प्रदेश चुनाव में तमाम राजनीतिक दलों ने 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस और बीजेपी की बात करें तो दोनों दलों ने कुल मिलाकर 459 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे हैं लेकिन गौर करने वाली बात है कि इनमें से मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 4 है। राजनीतिक दलों ने प्रदेश में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने में कंजूसी बरती है।

बीजेपी ने मध्यप्रदेश में सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने 3 मुस्लिम चेहरे उतारे हैं। बीजेपी ने इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश में सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी को खड़ा किया है जो की भोपाल उत्तर विधानसभा से फातिमा सिद्दीकी है। मध्य प्रदेश में कुल आबादी का लगभग 6 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। बावजूद इसके बीते दो विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस ने कुल 10 मुस्लिम प्रत्याशी ही मैदान में उतारे है।

कांग्रेस ने इस बार तीन मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं जिनमें भोपाल से दो मुस्लिम प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने भोपाल उत्तर से आरिफ अकील और भोपाल मध्य से आरिफ मसूद को टिकट दिया है और सिरोंज से मसर्रत शाहिद को मैदान में उतारा है। आरिफ अकील बीते 15 सालों से चुनाव जीतते आ रहे है। बीजेपी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में भी सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी आरिफ बेग को ही मैदान में उतारा था। कांग्रेस पार्टी ने 2013 विधानसभा चुनाव में 5 मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था।

चुनावों के मद्देनजर मध्य प्रदेश समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह मानते हैं कि प्रदेश की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी को देखते हुए 10 के लगभग सीटों पर इनको टिकट देना चाहिए लेकिन इस बार कांग्रेस ने जीत के पैमाने को ध्यान में रखकर टिकट बांटे हैं। इस मुद्दे पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना है कि बीजेपी कभी भी धर्म को ध्यान में रखकर टिकट नही देती बल्कि जीतने वाले प्रत्याशी को ही मैदान में उतारती है।

 

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here