अर्श से फर्श पर आगया यस बैंक ,जिसके शेयर की चर्चा “हीरा” से की जाती थी ,अब ‘ज़ीरा’ से होने लगा है

 

नई दिल्ली:निजी क्षेत्र का यस बैंक कभी निवेशकों का सबसे पसंदीदा हुआ करता था और उसके शेयर आसमान छू रहे थे, लेकिन रिजर्व बैंक की ओर से फंसे कर्ज (एनपीए) का खुलासा हर तिमाही करने के नए नियम से यस बैंक की मुश्किलें धीरे-धीरे बढ़ने लगीं और पिछले दो साल में इसके प्रबंधन की पोल खुल गई। रिजर्व बैंक की पैनी नजर काफी समय से इसपर बनी हुई थी और गुरुवार को उसने नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। यस बैंक को संकट से निकालने के लिए आरबीआई के कदम के बावजूद इसके शेयर शुक्रवार को 70 फीसद से अधिक टूट चुके हैं। यह 52 हफ्ते के अपने सबसे निचले स्तर पर है।

हालांकि गुरुवार सुबह यह खबर आने के बाद कि एसबीआई यस बैंक में हिस्सेदारी लेगा, उसके शेयर 29 फीसदी तक चढ़ गए। हालांकि, बाद में यस बैंक के शेयर 26.96 फीसदी चढ़कर 36.85 रुपये पर बंद हुए। एसबीआई ने शेयर बाजार को बताया है कि सेबी रेगुलेशन 2015 के तहत रेगुलेशन-30 के मुताबिक, हम एक समयसीमा में यह काम करेंगे और बाजार को इसकी जानकारी देंगे।

एसबीआई बोर्ड ने नकदी संकट से जूझ रहे यस बैंक में निवेश के लिए ‘सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के केंद्रीय बोर्ड ने गुरुवार को एक बैठक में मामले पर चर्चा की। देर शाम, एसबीआई बोर्ड ने शेयर बाजारों को सूचित किया, ”यस बैंक से संबंधित मामले पर गुरुवार को बैंक के केंद्रीय बोर्ड की बैठक में चर्चा की गई और बोर्ड ने बैंक में निवेश अवसर तलाशने के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है।

यह घोषणा तब की गई जब इससे कुछ घंटे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने यस बैंक पर पाबंदियां लगा दीं और एक महीने के लिए जमाकर्ताओं के वास्ते निकासी सीमा 50 हजार रुपये तय कर दी तथा इसके बोर्ड को भंग कर दिया। खबरों के अनुसार सरकार ने एसबीआई और एलआईसी दोनों से यस बैंक में सामूहिक रूप से 49 प्रतिशत शेयर हासिल करने को कहा है।

यस बैंक की स्थापना राणा कपूर ने अशोक कपूर के साथ मिलकर 2003 में की थी। राणा कपूर के पास बैंक दो करोड़ से ज्यादा शेयर थे। उन्होंने 2018 में कहा था कि ये हीरे कभी नहीं बेचूंगा तब राणा कपूर ने कहा था, जैसे हीरा सदा के लिए होता है, वैसे ही यस बैंक के शेयर मेरे पास सदा के लिए रहेंगे। इन शेयरों को मैं अपनी तीन बेटियों और उनके बच्चों को दूंगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए मैं अपनी वसीयत में भी लिखूंगा कि एक भी शेयर को बेचा न जाए, लेकिन अंत में उनके पास सिर्फ 900 शेयर रह गए थे, जिनकी कीमत महज 58 हजार रुपये रह गई थी।

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