साहिब हमें बाबरी मस्जिद नहीं चाहिये हमें इंसाफ़ चाहिये…

मोहम्मद हसीब
हमारे देश के अदलिया को ऐसा क्यूँ लगता है कि बाबरी मस्जिद जैसे हस्सास मसले को अदालत के बाहर बैठ कर  तीन लोगों द्वारा हल कर लिया जाएगा
और उस पर मजीद करम ये की  अदालत ने जीनलोगों को चुना है उन में से एक तो पहले ही कह चुके है के अगर बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर नहीं बना तो देश में सीरिया जैसे हालात हो जाएंगे
अगर अदलिया के पास ताकत नहीं सच और झूठ में फर्क करने को तो फिर ताला लगा देना चाहिए क्या फायदा इतनी मोटी मोटी रकम खर्च करने से
हिंदुस्तान के सेक्युलर छवी दावं पर लगी है फैसला दलील से होना चाहिए दलाली से नहीं
हमको भव्य मस्जिद नहीं चाहिये मी-लार्ड हमको सिर्फ़ आपका इंसाफ़ चाहिए.
अगर आपके पास पूरे सबूत हैं की बाबरी मस्जिद राम मंदिर को तोड़कर बनाई थी तो आप वही फ़ैसला दें कोई मुसलमान चूं तक नहीं करेगा.
मुसलमान अपने मोहल्ले की मस्जिदों को ही आबाद करलें वही काफ़ी है लेकिन फ़ैसला तो दीजिये, दुनियाँ को बताइये तो भारत की अदालतों में कितना इंसाफ मिलता है, बताइये के हमारे यहाँ अदालतें Democracy का एक स्तम्भ हैं एक pillar है, यह सरकार की कठपुतली नहीं हैं.

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