अयोध्या में पूजा की मांग वाली याचिका खारिज ,सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आप इस देश को कभी शांति से नहीं रहने देंगे

 

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 अप्रैल) को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल से लगी ‘67.7 एकड़ भूमि के अविवादित हिस्से’ पर पूजा करने की अनुमति देने की याचिका खारिज कर दी। अयोध्या स्थित अविवादित जमीन पर मौजूद 9 प्राचीन मंदिरों में पूजापाठ की इजाजत की मांग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘आप इस देश को कभी शांति से नहीं रहने देंगे।’ चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, ‘वहां हमेशा ही कुछ होगा।’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के 10 जनवरी के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। दरअसल, हाई कोर्ट ने वहां 9 मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के लिए उसकी सहमति मांगने वाली एक याचिका खारिज कर दी थी और याचिकाकर्ता को खर्च के तौर पर पांच लाख रुपये भी भरने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पंडित अमरनाथ मिश्रा को इस मुद्दे पर कुरेदना बंद करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता मिश्रा ने हाई कोर्ट के समक्ष दावा किया था कि अधिकारी प्राचीन मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां शुरू किए जाने को लेकर आंखें मूंदे हुए हैं। उनकी दलील थी कि ये मंदिर अयोध्या में कब्जे में लिए गए, लेकिन अविवादित भूमि पर हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस भूमि विवाद के हल के लिए हाल ही में मध्यस्थों का एक पैनल नियुक्त किया है। बता दें कि निर्मोही अखाड़े ने 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर केंद्र सरकार की उस याचिका का विरोध किया जिसमें विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थान के आसपास 67.390 एकड़ ‘अविवादित’ अधिग्रहित भूमि को मूल मालिकों को लौटाने की अपील की गई है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में फैसला दिया था कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन बराबर हिस्सों में बांटी जाएगी और उसे निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड और राम लल्ला को दिया जाएगा। निर्मोही अखाड़े ने अपनी नई अर्जी में केंद्र सरकार की याचिका का विरोध किया है जिसमें उसने सुप्रीम कोर्ट के 2003 के फैसले में संशोधन की अपील की है। 2003 के फैसले में अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के आसपास 67.390 एकड़ ‘अविवादित’ अधिग्रहित जमीन मूल मालिकों को लौटने की अनुमति दी गई है।

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