नीतीश सरकार पर अपनों का वार, विधायकों की स्थिति चपरासी से भी बदतर:BJP MLA

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बिहार में तबादलों के बाद सियासत गरमाई हुई है। नीतीश सरकार पर अब उन्हीं के विधायक वार करते नज़र आ रहे हैं। एक तरफ जहां बिहार सरकार के मंत्री और जेडीयू नेता मदन साहनी ने इस्तीफे की पेशकश की है, तो दूसरी तरफ भाजपा के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने नीतीश के मंत्रियों पर ट्रांसफर पोस्टिंग के जरिए करोड़ों कमाने का आरोप लगाया है।

ज्ञानू ने तो यहां तक कह दिया कि अगर मंत्रियों के घर पर छापे मारे जाए तो करोड़ों रुपये बरामद हो सकते है। उन्होंने कहा कि भाजपा के ज्यादातर मंत्रियों ने अफसरों को बुला-बुला कर उनसे पैसों की मांग की थी। ज्ञानू ने कहा कि इसमें ज्यादातर भारतीय जनता पार्टी के मंत्री शामिल हैं। इसमें खुलकर पैसा लिया गया है… और एक-एक अफसर को 5-5 बार फोन किया गया. कि आप आइए, पैसा दीजिए तब आपका ट्रांसफर होगा। भाजपा विधायक की ओर से अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर इस तरह के आरोप के बाद सरकार घिरती नजर आ रही है।

ज्ञानू ने कहा है कि JDU के ज्यादातर मंत्रियों ने नीतीश कुमार के डर से पैसा नहीं लिया है, लेकिन बीजेपी के मंत्रियों ने तबादलों के लिए जमकर पैसा लिया है। ज्ञानू की मानें तो उन्हें इसकी पक्की खबर उन अफसरों से ही मिली है, जिनका पैसे लेकर ट्रांसफर किया गया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के 80 फीसदी मंत्रियों ने घूस लिया है।

ज्ञानू ने बिना किसी का नाम लिए कहा है कि JDU से आनेवाले एक मंत्री जो निर्माण विभाग से जुड़े हैं, उन्होंने भी जमकर ट्रांसफर के लिए पैसे लिए हैं। पैसे लेनेवाले मंत्री को उन्होंने हाइ प्रोफाइल और JDU में दूसरे दल से आनेवाला बताया है।

भाजपा विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश की तबीयत खराब होने की वजह से उनसे मुलाकात नहीं हो सकी है। जैसे ही वे ठीक होंगे उनसे मिलकर ये सारी बातें उन्हें बताउंगा। इसमें JDU के एक-आध ही शामिल हैं पर भाजपा के ज्यादा हैं। नीतीश कुमार के कारण JDU में इन सभी चीजों पर नियंत्रण है।

वहीं बिस्फी से बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल विधायकों की हैसियत को लेकर भड़के हुए हैं। कहा कि विधायकों की स्थिति चपरासी से भी बदतर हो गयी है। कोई नहीं सुनता। ब्लॉक में भ्रष्टाचार है, शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती। अधिकारी सुनते नहीं। अपने क्षेत्र की समस्या लेकर आखिर विधायक कहां जाए? विधायक अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं, लोग उनके पास शिकायत लेकर आते हैं। विधायकों का दायित्व है कि वे उसका निदान करें। हम आदेश क्या देंगे, अनुरोध भी नहीं कर सकते। विधायकों का मान-सम्मान दांव पर है।

 

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