पंजाब में अकाली दल और बहुजन समाजवादी पार्टी का हुआ गठबंधन, 97 सीटों पर SAD तो 20 सीटों पर लड़ेगी BSP

किसी भी वीडियो को डाउनलोड करें बस एक क्लिक में 👇
http://solyptube.com/download

2022 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, ऐसे में चुनावी महकमे हलचल सिर्फ उत्तर प्रदेश में नहीं पंजाब में भी बढ़ने लगी है। जहां पिछले 4 साल से कैप्टन अमरिंदर निर्विवाद रूप से सरकार चला रहे थे, वहां अचानक से पिछले 1 महीने में टूट-फूट की तमाम खबरें आने लगी।

कैप्टन और सिद्धू के बीच मनमुटाव तो पहले से जगजाहिर थी मगर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने जब 25 विधायकों को दिल्ली बुलाकर अलग से बैठकें की तो इस बात पर मुहर लगी कि पंजाब सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के अंदर बेचैनी है।

इसी मौके का फायदा उठाते हुए तेजी से सक्रिय हुए विपक्ष ने चुनावी दांव खेलने शुरू कर दिए हैं। लंबे समय से BSP से गठबंधन करने की इच्छुक SAD ने बातचीत को गति दी और अब बसपा प्रमुख मायावती से हाँ भरवा लिया।

बहुजन समाजवादी पार्टी और अकाली दल के गठबंधन की आधिकारिक घोषणा करने के लिए SAD की तरफ से सुखबीर सिंह बादल और उनके तमाम सहयोगी नेता और BSP की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष जसबीर सिंह गढ़ी और राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा मौजूद रहे।

घोषणा के अनुसार आगामी चुनाव में SAD 97 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो BSP 20 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

आजादी के पहले से हो रहे प्रांतीय चुनावों से लेकर आज तक के चुनाव में जो अकाली दल पंजाब में सबसे मजबूत रही है, उसने अगर बहुजन समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया है तो उसके पीछे राजनैतिक गुणा गणित है। पंजाब में दलितों की आबादी 30 प्रतिसत से ज्यादा है इसलिए दलित वोटों को रिझाने के लिए तमाम दल वहां अलग-अलग पोस्ट ऑफर करते रहते हैं।

क्योंकि बहुजन समाजवादी पार्टी देशभर में दलितों के बीच सबसे लोकप्रिय पार्टी है, और इसके संस्थापक कांशीराम की जन्मस्थली भी पंजाब है तो बसपा से गठबंधन करके दलितों के वोटों को एकमुश्त खींचने की तैयारी की जा रही है।

बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मायावती भी आज के हालातों से परिचित हैं कि अलग से चुनाव लड़ने पर उन्हें दलितों का एकतरफा समर्थन नहीं मिलेगा मगर पंजाब के अंदर पहले से एक मजबूत जनाधार की पार्टी के साथ खड़े होने पर उन्हें मनचाही जीत मिल सकती है। ये आंकलन इस आधार पर भी लगाए जा सकते हैं कि 1996 में लोकसभा चुनाव के लिए बहुजन समाजवादी पार्टी ने अकाली दल के साथ गठबंधन किया था और 3 लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही थी।

आंकड़े बताते हैं कि अगर 2019 में भी ऐसा किया गया होता तब भी बहुजन समाजवादी पार्टी कम से कम 3 लोकसभा सीटें जीत सकती थी। क्योंकि सभी बड़े दलों से अलग होकर एक नए फ्रंट से चुनाव लड़ने पर भी बसपा को औसतन हर सीट पर डेढ़ लाख से ज्यादा वोट मिले।
जो इस राज्य में कांग्रेस और अकाली के बाद किसी दल का बेहतरीन प्रदर्शन था।

गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों की वजह से SAD ने भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन तोड़ दिया है और हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही बीजेपी को पंजाब की राजनीति से लगभग विलुप्त कर दिया गया है।

Donate to JJP News
जेजेपी न्यूज़ को आपकी ज़रूरत है ,हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं,इसे जारी रखने के लिए जितना हो सके सहयोग करें.

Donate Now

अब हमारी ख़बरें पढ़ें यहाँ भी
loading...