राहुल को लेकर बाबा रामदेव ने दिया बड़ा बयान , कहा अगले 10-20 साल तक मोदी का विकल्प नहीं

नई दिल्ली :योग गुरु और पतंजलि के सर्वेसर्वा स्वामी रामदेव ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नहीं बल्कि राष्ट्र के भक्त हैं। चूंकि, पीएम देशभक्त हैं, इसलिए वह उनके सहयोगी हैं। मोदी का अगले 10-20 साल तक कोई विकल्प नहीं है।

बाबा रामदेव ने इसके अलावा कांग्रेस के राहुल गांधी को सुझाव दिया कि उन्हें त्रियोग करना चाहिए, जबकि पार्टी नेता दिग्विजय सिंह समाधि ले मौन योग करें। योगगुरु ने ये बातें शनिवार को ‘News 18 India’ से बातचीत के दौरान कहीं।

दरअसल, पत्रकार अमिश देवगन ने उनसे पूछा था- क्या देश में मोदी फैक्टर है? जवाब आया, “नरेंद्र मोदी के प्रति देश के करोड़ों लोगों में इतना ऊंचा विश्वास है कि उनके दूसरे नंबर जो राजनीतिक व्यक्ति है, वह हजारों किमी दूर है। फासला आसमान और जमीन का है। सारा देश जानता है कि मोदी को कुछ नहीं चाहिए।

उन्हें प्रभु की कृपा से सब कुछ मिला है। वह देश बेच नहीं सकता है। मुल्क से गद्दारी नहीं कर सकता। देश तोड़ नहीं सकता और छोड़ भी नहीं सकता। ऐसा व्यक्ति, जिसका अपने लिए कुछ नहीं है। सब कुछ सिर्फ और सिर्फ मातृभूमि के लिए है।”

बकौल रामदेव, “लोकतंत्र में सबसे बड़ा भरोसा इस समय किस पर है? इस वक्त भारतीय राजनीति में मोदी का कोई विकल्प अभी तक आने वाले 10-20 सालों में मुझे तो दिखता नहीं है। बाकी भगवान के विधान से कोई पैदा हो जाए, तो दोबारा चर्चा कर लेंगे।”

‘आप मोदी भक्त हैं’ इस आरोप पर जब सवाल हुआ, तो उन्होंने कहा- मैं मोदी भक्त नहीं राष्ट्रभक्त हूं। मैं प्रभु, गांव, गरीब, मजदूर, किसान, दलित, शोषित, वंचित, पिछड़ों का भक्त हूं।

मैं सेवा करने वाला साधक, योगी और कर्मयोगी हूं, क्योंकि मोदी राष्ट्रभक्त हैं, इसलिए उनका सहयोगी हूं। सबको कहता हूं कि योगी बनो, उद्योगी बनो और अच्छे कामों में सहयोगी बनो। यही वेद का संदेश है। यही मर्म की बात है।

पूर्व यूएस राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब ‘ए प्रॉमिस लैंड’ में कांग्रेस चीफ रह चुके राहुल गांधी के जिक्र को लेकर प्रश्न पर रामदेव बोले- ये बात बहुत व्यक्तिगत हो जाती है। पर इतना कहूंगा कि देश चलाने के लिए मात्र एक खानदान का होना जरूरी नहीं है।

देश की समझ, भारत की समझ, समग्र सोच होनी चाहिए। हर क्षेत्र और विषय के बारे में। बहुत गहरी सोच की जरूरत है। कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि ‘अरे, जिसे कुछ नहीं आता, वह राजनीति कर ले।’ पर राष्ट्र चलाना बहुत बड़ी बात है।

देश चलाने वालों में हजारों रतन टाटा, अडानी, अंबानी और तमाम वैज्ञानिक सरीखों महामेधा की जररूत है। ऐसी मेधा किसी खानदान से नहीं मिलती है। यह दुकानों पर नहीं बिकती है। इसका होलसेल क्या रिटेल काउंटर नहीं होता।

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