बिग बाजार वाला फ्यूचर रिटेल भी दीवालिया होने की कगार पर,अब बियानी सेठ का भी नम्बर आ गया

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नई दिल्ली :लगातार देश की हालत बद से बदतर होती जा रही है लेकिन सत्ता में बैठे आकाओं की इसकी कोई फ़िक्र नहीं है सरकारी कंपनियों के बाद अब प्रावेट बड़ी कंपनी की भी हालत खराब हो रही है इसी कर्म में किशोर बियानी की कंपनी फ्यूचर रिटेल के लिए आज का दिन काफी अहम है। कंपनी को अपने कूपन होल्डर्स को 105 करोड़ रुपए (1.40 करोड़ डॉलर) का इंटरेस्ट चुकाना है। इंटरेस्ट का यह बकाया 50 करोड़ डॉलर के सीनियर सिक्योर्ड नोट्स का है। बियानी की रिटेल कंपनी अगर आज इंटरेस्ट नहीं चुका पाती है तो यह डिफॉल्ट कर जाएगी। इसके बाद रेटिंग एजेंसियां इसकी रेटिंग डाउनग्रेड कर सकती है। ।।

मोनीकंट्रोल की खबर के अनुसार इस साल मार्च में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही किशोर बियानी की कंपनियां मुश्किल में पड़ गईं। कंपनी की वित्तीय स्थिति पहले से डांवाडोल थी। ऐसे में लॉकडाउन ने इसकी हालत और खराब कर दी।सितंबर 2019 में फ्यूचर ग्रुप पर 12,779 करोड़ रुपए का कंसॉलिडेटेड कर्ज था। मार्च 2019 तक इसकी फ्लैगशिप कंपनी फ्यूचर रिटेल पर 2657 करोड़ रुपए का कर्ज था। CNBC-TV 18 के मुताबिक, फ्यूचर ग्रुप को बड़ा कर्ज देने वाले एक बैंक के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “कंसोर्शियम में शामिल हर बैंक जितना कर सकते थे, किया है। अब देखना है कि कंपनी कर्च चुका पाती है या नहीं।” इस अधिकारी ने कहा, “फ्यूचर ग्रुप ने कुछ सरकारी बैंकों से हर वो लोन ले लिया है जो Covid-19 इमरजेंसी के दौरान उपलब्ध था।”

कंपनी ने एक्सचेंज को जो जानकारी दी है उसके मुताबिक, कंपनी को पहले 22 जुलाई को 2025 डॉलर नोट्स पर 5.60 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना था। लेकिन कंपनी पेमेंट नहीं कर पाई। एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, “कोरोनावायरस संक्रमण के कारण देश भर में लॉकडाउन शुरू होने से कंपनी के कारोबार पर बुरा असर हुआ। कंपनी की लिक्विडिटी पोजीशन कमजोर हुई और 22 जुलाई को वह इंटरेस्ट पेमेंट नहीं कर पाई। इसके बाद पेमेंट के लिए अतिरिक्त 30 दिनों का वक्त दिया गया।” लेकिन अब ये 30 दिन की मोहलत भी खत्म हो गई है।

फ्यूचर ग्रुप को कर्ज देने वाले एक अन्य बैंक के अधिकारी ने कहा, RBI के 6 अगस्त के Covid-19 रेज्योलूशन फ्रेमवर्क के मुताबिक, लोन को अगले दो साल के लिए रीस्ट्रक्चपर किया जा सकता है। नाम जाहिर ना करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया है कि रीस्ट्रक्चर का ऑप्शन है लेकिन इसके लिए RBI के सर्कुलर को देखना होगा। यह भी चेक करना होगा कि कंपनी का कोई एसेट बेचकर पैसा वसूला जा सकता है या नहीं। या इसके अलावा भी कोई विकल्प है।

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