इस ख़बर को पढ़ने के बाद भारत में कारोबार करने वाले लोग सरकार पर हंस रहे होंगे

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एमेज़ॉन में जाँच हो रही है कि वकील को फ़ीस देने के नाम पर कहीं सरकारी अधिकारी को रिश्वत तो नहीं दी गई है। एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि भारत में एमेजॉन के वकील को फ़ीस के तौर पर बीस करोड़ दिए गए जिसका इस्तमाल भारतीय अफ़सरों को रिश्वत देने में हुआ।एमेज़ान इस बात की आतंरिक तौर पर जाँच करा रहा है कि आरोप सही है या नहीं।

इस ख़बर को पढ़ने के बाद भारत में कारोबार करने वाले लोग हंस रहे होंगे कि इसमें जाँच की क्या बात है। बिना रिश्वत के आदान-प्रदान के कोई कारोबार कर ही नहीं सकता है। आप सड़क के किनारे ठेला नहीं लगा सकते हैं। एक मार्केट में गया था। बुज़ुर्ग दुकानदार रो रहे थे कि जिसे पार्किंग का ठेला मिला है उसने कार की जगह पर ठेले वाले को किराए पर दे दिया है और वहाँ पर अलग मार्केट बस गया है। जिन लोगों ने किराया देकर कपड़े की दुकान खोली है उनकी बिक्री कम हो गई है। अब जो बाज़ार आता भी है तो सड़क पर कार पार्क करता है तो पुलिस ले जाती है और वहाँ भी लेन-देन होता ही होगा। नतीजा ग्राहकों ने आना कम कर दिया है। उन्हें बताते हुए दुख तो हो रहा था लेकिन मुझे सुनते हुए हैरानी नहीं हो रही थी। कहा कि बाज़ार संघ क्यों नहीं बोलता तो अंकल ने कहा कि सब चुप रहते हैं। पार्किंग वाला कहता है कि निगम में बहुत पैसे माँगते हैं। कार की पार्किंग से खर्चा नहीं निकलता है। हम कुछ नहीं कर सकते। यानी छोटा मोटा काम इस तरह की धांधली और लूट के बिना नहीं होता है। इसकी कहीं कोई जाँच और सुनवाई नहीं है। बड़ी कंपनी और दुकान चलाने वाले तो बताएँगे भी नहीं। वही डर के मारे।
अमरीका का क़ानून है कि उसकी कंपनी दुनिया में कहीं भी कारोबार हासिल करने के लिए उस देश में रिश्वत नहीं देगी। इसलिए रिश्वत के आरोप आने पर गंभीरता से जाँच होती है

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