बच्चे कुदरत की देन है , इस पर रोक लगाने का हक नहीं, समाजवादी पार्टी सांसद

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उत्तर प्रदेश की बढ़ती आबादी पर अंकुश लगाने के लिये राज्य का विधि आयोग एक कानून के मसौदे पर विचार कर रहा है। इसी बीच संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्र रहमान बर्क ने इस कानून का विरोध किया है और कहा है कि बच्चे कुदरत की देन है… इसपर रोक लगाने का किसी को हक नहीं है।

समाजवादी पार्टी सांसद ने कहा , कितने बच्चे पैदा होंगे, क्या होग, यह निजामे कुदरत है। क़ुदरतों के तौर तरीके पर हमें रुकावट डालने का कोई हक नहीं है। सारे इन्सानों को अल्लाह ताला ने ही पैसा किया है। मौत और ज़िंदगी उनके ही हाथ में है किसी और के नहीं। शफीकुर्र रहमान ने यूपी में धर्मांतरण के खुलासे के मांमले पर भी बोलते हुए कहा है कि ये भाजपा की पॉलिसी है की चुनाव से पहले हिन्दू मुस्लिम के बीच नफरत पैदा करने बाली पॉलिसी बनाती है जिससे उसे चुनाव में ज्यादा वोट मिल सके। लेकिन इस नफरत की पॉलिसी से भाजपा को वोट नहीं मिलेंगे बल्कि इससे नुकसान ही होगा।

वहीं समाजवादी पार्टी विधायक इकबाल महमूद ने विवादित बयान देते हुए कहा कि कानून की आड़ में मुसलमानों पर वार करने की साजिश है और मुस्लिमों नहीं, बल्कि दलितों एवं आदिवासियों की वजह से आबादी बढ़ रही है। महमूद ने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिये एक कानून लाने पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा, दरअसल यह जनसंख्या की आड़ में मुसलमानों पर वार है। बीजेपी के लोग अगर समझते हैं कि देश में सिर्फ मुसलमानों की तादाद बढ़ रही है तो यह कानून संसद के अंदर आना चाहिए था ताकि पूरे देश लागू होता। यह उत्तर प्रदेश में ही क्यों लाया जा रहा है।

सम्‍भल सीट से समाजवादी पार्टी विधायक ने कहा ”सबसे ज्यादा आबादी दलितों और आदिवासियों के यहां बढ़ रही है, मुसलमानों के यहां नहीं। मुसलमान तो अब समझ गये हैं कि दो—तीन बच्चों से ज्यादा नहीं होने चाहिए।’ उन्होंने कहा कि इस कानून का नतीजा भी NRC जैसा ही होगा और असम में NRC का असर मुसलमानों पर कम और गैर मुस्लिमों पर ज्यादा पड़ा।

समाजवादी पार्टी विधायक ने कहा कि जनसंख्या कानून का भी यही हश्र होगा और यह समझ में नहीं आता कि योगी सरकार का महज सात महीने का कार्यकाल बचा है, ऐसे में जनसंख्या कानून पर बात क्यों की जा रही है।

गौरतलब है कि UP की बढ़ती आबादी पर अंकुश लगाने के लिये राज्य का विधि आयोग एक कानून के मसविदे पर विचार कर रहा है। आयोग के अध्यक्ष आदित्यनाथ मित्तल के मुताबिक राज्य की जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगाने के लिये आयोग ने कानून के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है। यह मसविदा दो महीने के अंदर तैयार करके राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।

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