पूर्व CM अब्दुल्ला ने सुरक्षा मंजूरी पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के आदेश के खिलाफ आवाज उठाई

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श्रीनगर: नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पुलिस की प्रतिकूल रिपोर्ट अदालत में दोषी पाए जाने के बराबर नहीं हो सकती।

यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर पुलिस की सीआईडी(CID) ​​शाखा द्वारा पथराव या विध्वंसक गतिविधियों में शामिल सभी लोगों को पासपोर्ट और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए आवश्यक सुरक्षा मंजूरी से इनकार करने के आदेश के एक दिन बाद आई है।

नेशनल कांफ्रेंस नेता ने ट्विटर पर लिखा, एक प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट कानून की अदालत में दोषी पाए जाने का विकल्प नहीं हो सकती है। डेढ़ साल पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत मेरी नजरबंदी को सही ठहराने के लिए एक प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट बनाई थी जोकि कानूनी चुनौती के दौरान नहीं टिकेगी।

वह अगस्त 2019 में मोदी द्वारा जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने के बाद अपनी पीएसए नजरबंदी का जिक्र कर रहे थे।

तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अपराध या बेगुनाही अदालत में साबित होनी चाहिए और यह अप्रमाणित पुलिस रिपोर्टों पर आधारित नहीं होनी चाहिए।

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