मेवात में हिंदुओं के जनहित याचिका पर विचार करने से कोर्ट ने किया इनकार , जांच के लिए SIT की मांग

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मेवात में महिलाओं और बच्चियों सहित हिंदुओं की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है और उनका अस्तित्व मुश्किल हो गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि क्षेत्र में प्रमुख मुस्लिम समुदाय ने हिंदुओं पर अधिकार कर लिया है और मुस्लिम समुदाय द्वारा हिंदुओं पर कथित अत्याचारों की एक विशेष जांच दल द्वारा जांच की मांग की है।

मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा: यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए कोई मामला नहीं है। हालांकि याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई और एनआईए के सदस्यों से मिलकर एक विशेष जांच दल गठित करने के लिए शीर्ष अदालत से निर्देश मांगा था।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया है कि हरियाणा के नूंह जिले के मेवात में रहने वाले हिंदुओं के मौलिक अधिकारों को मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा लगातार कम किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया, राज्य सरकार के साथ-साथ जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस कानून द्वारा निहित शक्तियों का प्रयोग करने में विफल रही है, जिसके कारण प्रत्येक हिंदू और विशेष रूप से महिलाओं और दलितों का जीवन और स्वतंत्रता खतरे में है।

दलील में दावा किया गया कि तब्लीगी जमात के संरक्षण में मुसलमानों ने धीरे-धीरे अपनी ताकत बढ़ाई है और अब स्थिति यह है कि हिंदू आबादी कम हो रही है, और पिछली जनगणना 2011 के बाद से यह 20 प्रतिशत से घटकर 10-11 प्रतिशत हो गई है।

याचिका में कहा गया, कई हिंदुओं को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया है और कई हिंदू महिलाओं और नाबालिग लड़कियों का अपहरण और बलात्कार किया गया है। हिंदू महिलाएं बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। बड़ी संख्या में मुसलमानों ने अनुसूचित जाति के सदस्यों पर अत्याचार किया है।

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