दिल्ली दंगे: जमानत पर बाहर आते ही देवांगना, आसिफ और नताशा ने कहा वे हमें जेल की धमकी से डरा नहीं पाएंगे

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तनहा गुरुवार शाम तिहाड़ जेल से रिहा कर दिए गए और उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है. जेल से उनके बाहर आने के कुछ ही घंटे पहले एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा ‘साजिश’ मामले में तुरंत उनकी रिहाई का आदेश दिया था.

दो दिन पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के तहत पिछले साल मई में गिरफ्तार नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तनहा को जमानत दे दी थी. अब तीनों को रिहा कर दिया गया है. छात्र कार्यकर्ता नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तनहा उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

” हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे”
तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद छात्र कार्यकर्ता नताशा नरवाल ने कहा, ‘हमें जेल के अंदर जबरदस्त समर्थन मिला है और हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे.’ जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए पिंजरा तोड़ मुहिम की कार्यकर्ता नरवाल ने कहा कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था, तब उन्हें यह यकीन करने में कई महीने लग गये कि वे इस तरह के कठोर आरोपों में जेल में कैद हैं.

हमारा विरोध आतंकवाद नहीं महिलाओं के नेतृत्व में एक लोकतांत्रिक प्रदर्शन था
मामले के अब तक कोर्ट में विचाराधीन होने का जिक्र करते हुए कालिता ने कहा, ‘हम जिस चीज में यकीन रखते हैं उसे कायम रखने के लिए हम दिल्ली हाईकोर्ट का शुक्रिया अदा करना चाहेंगे. इस तरह का कोई प्रदर्शन जो हमने किया है, आतंकवाद नहीं है. यह महिलाओं के नेतृत्व में एक लोकतांत्रिक प्रदर्शन था. ’

नताशा नरवाल ने कहा, “हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम ऐसे बिंदु पर कैसे पहुंचे जहां आतंकवाद और असहमति के बीच की रेखा धुंधली हो गई है? लोगों को बेबुनियाद आरोपों में जेल में डाल दिया गया है. जब लोग विरोध करते हैं, तो यह आतंकवाद नहीं है.”

नताशा ने कहा, “वे हमें जेल की धमकी नहीं दे पाएंगे. अगर वे हमें जेल में डालने की धमकी देते हैं, तो यह हमारी लड़ाई को जारी रखने के हमारे संकल्प को मजबूत करेगा.” नताशा ने बताया कि जब वह जेल में थी तो उनके पिता महावीर नरवाल की मई में कोविड से मृत्यु हो गई, . नरवाल को लेने आए उनके भाई ने कहा कि उन्हें अपने पिता की याद आती है, अगर वे जीवित होते तो जेल से बाहर आने पर उनका अभिवादन करने आते.

” हम ऐसी महिलाएं हैं जो उनसे नहीं डरती”
सरकार पर प्रहार करते हुए छात्र कार्यकर्ता देवांगना ने कहा, अपनी आवाज उठाने को लेकर लोग जेल में कैद हैं. “यह सरकार की हताशा को दर्शाता है . हम ऐसी महिलाएं हैं जो उनसे नहीं डरती हैं,” कलिता ने जेल के गेट से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से कहा, “हम बच गए क्योंकि हमें दोस्तों, शुभचिंतकों से जबरदस्त समर्थन मिला. मैं उन सभी को धन्यवाद देती हूं,”

उन्होंने कहा, ‘यह सरकार की हताशा को प्रदर्शित करता है. हम ऐसी महिलाएं हैं जो सरकार से नहीं डरते हैं. वे लोगों की आवाज और असहमति को दबाने की कोशिश कर रहे हैं. हमें लोगों से अपार समर्थन मिला, जिसने हमें जेल के अंदर जीवित रहने में मदद की.’ती है, अगर वे जीवित होते तो जेल से बाहर आने पर उनका अभिवादन करने आते.

” हम ऐसी महिलाएं हैं जो उनसे नहीं डरती”
सरकार पर प्रहार करते हुए छात्र कार्यकर्ता देवांगना ने कहा, अपनी आवाज उठाने को लेकर लोग जेल में कैद हैं. “यह सरकार की हताशा को दर्शाता है . हम ऐसी महिलाएं हैं जो उनसे नहीं डरती हैं,” कलिता ने जेल के गेट से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से कहा, “हम बच गए क्योंकि हमें दोस्तों, शुभचिंतकों से जबरदस्त समर्थन मिला. मैं उन सभी को धन्यवाद देती हूं,”

” मैं हमेशा ही उम्मीद करती रही कि पुलिस अधिकारी आएंगे और मुझे गिरफ्तार करेंगे”
तनहा ने कहा, ‘उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन वह रिहा हो जाएंगे. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सीएए,एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. मुझे खुशी है कि माननीय अदालत ने कहा कि हमारे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन का दंगों से कोई लेना देना नहीं था. मुझे उम्मीद है कि सुनवाई त्वरित तरीके से होगी और हम जल्द ही बरी हो जाएंगे. ’ तनहा स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के सदस्य हैं.

अन्य कैदियों की रिहाई की मांग करते हुए उन्होंने सरकार से जेल में कोविड से जुड़ी स्थिति में सुधार करने की भी अपील की. हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहाई में देर होने पर कालिता ने कहा कि यह अविश्सनीय है क्योंकि उन्हें दो तीन दिन पहले जमानत मिल गई थी. उन्होंने कहा, ‘अब तक हम जेल में थे. मैं हमेशा ही उम्मीद करती रही कि कुछ पुलिस अधिकारी आएंगे और मुझे गिरफ्तार करेंगे. ’

इससे पहले छात्र कार्यकर्ताओं के मित्र और परिवार के सदस्य उनकी रिहाई से पहले जेल के बाहर एकत्र थे. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्राएं नरवाल और कालिता ने जेल में साल भर रहने के दौरान मिले समर्थन को लेकर अपने मित्रों ओर शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा किया. इनमें से कई लोग उनकी रिहाई के मौके पर जेल के बाहर एकत्र थे.

तिहाड़ से बाहर आते ही गूंजा ‘लाल सलाम’
‘पिंजरा तोड़’ मुहिम की दोनों कार्यकर्ताओं के तिहाड़ से बाहर आते ही ‘लाल सलाम’, ‘नताशा जिंदाबाद’, ‘देवांगना जिंदाबाद’ के नारों के साथ उनका अभिवादन किया गया.

नताशा के पिता महावीर नरवाल की याद में भी नारे लगाये गये, जिनकी पिछले महीने कोविड-19 से मृत्यु हो गई थी. तनहा जेल के एक अलग द्वार से बाहर आए. जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इस छात्र ने मास्क पहन रखा था, जिसपर ‘No CAA, No NRC, No NPR’ लिखा था.

CAA,NRCऔर NPR के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी
तनहा ने जेल से बाहर आने पर कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन वह रिहा हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि सीएए,एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. जेल के बाहर एकत्र छात्र बैनर लिए हुए थे, जिन पर जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद सहित अन्य राजनीतिक कैदियों को रिहा करने तथा यूएपीए को रद्द करने की मांग की गई थी. इसकी कानून के तहत तीनों छात्र कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था.

जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कालिता और नरवाल को शाम सात बजे और तनहा को साढ़े सात बजे रिहा किया गया. तीनों छात्र कार्यकर्ताओं के पते और मुचलके के सत्यापन में देरी के कारण जेल से उनकी रिहाई में देरी हो रही थी.

दिल्ली की एक अदालत ने तीनों की तुरंत रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि पुलिस द्वारा सत्यापन प्रक्रिया में देरी आरोपियों को जेल में रखने की स्वीकार्य वजह नहीं हो सकती. हाईकोर्ट से जमानत लेने के बाद कार्यकर्ताओं ने जेल से तुरंत रिहाई के लिए निचली अदालत का रुख किया था.

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