जीएसपी दर्जा खत्म करने पर अतिवादी विचार

अवधेश कुमार

अमेरिका द्वारा जीएसपी यानी व्यापार में वरीयता की सामान्य व्यवस्था  के तहत भारत को विकासशील देश के रूप में निर्यातित सामग्रियों पर शुल्क छूट का लाभ समाप्त करने को लेकर भारत के अंदर जैसा वातावरण निर्मित हुआ उसकी आवश्यकता नहीं थी। दरअसल, हमारे यहां कई बार तथ्यों से ज्यादा भावनाओं में प्रतिक्रिया व्यक्त की जाती है। अमेरिका ऐसा करने वाला है यह पहले से स्पष्ट था। राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 मार्च को कह दिया था कि यदि भारत में अमेरिकी सामानों को अपने बाजार तक समान और यथोचित पहुंच उपलब्ध नहीं कराया तो अगले साठ दिनों में जीएसपी दर्जा समाप्त कर देंगे। अब उनका कहना है कि चूंकि भारत ने इस संबंध में आश्वासन नहीं दिया है इसलिए 5 जून से भारत का दर्जा खत्म। ट्रंप सरकार की दलील है कि भारत कई क्षेत्रों में अपने बाजार तक अमेरिका को समान और यथोचित पहुंच दिलाने में विफल रहा है। 60 दिन की अवधि 3 मई को ही खत्म हो गई थी।  वैसे भारी संख्या में अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप से ऐसा न करने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने अमेरिकी संसद के नेताओं को लिखे पत्र में कहा था कि बातचीत में मुझे लगा कि भारत ने अमेरिका को यह भरोसा नहीं दिलाया कि वह अमेरिका के लिए बाजार उतना ही सुलभ बनाएगा जितना अमेरिका ने उसके लिए बनाया है। अमेरिका की दलील है कि भारत अपने कई सामान अमेरिका में बिना किसी आयात शुल्क के बेचता है, लेकिन भारत में सामान बेचने के लिए अमेरिका को आयात शुल्क चुकाना होता है। हालांकि अभी बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं। अमेरिका ने कहा था कि भारत सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की जाएगी। यह देखना है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में क्या रास्ता निकलता है।

इसका अर्थ यही है कि जीएसपी की सुविधा खत्म करने के बावजूद अमेरिका भी इसे अंतिम नहीं मानता और आगे बातचीत जारी रखेगा। आइए पहले समझें कि यह मामला है क्या? जीएसपी का मतलब है जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज। यह अमेरिका द्वारा विकासशील एवं गरीबी देशों को व्यापार में दी जाने वाली तरजीह की सबसे पुरानी और बड़ी प्रणाली है। इसकी शुरुआत 1976 में इन देशों में आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए हुई थी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार जीएसपी का उद्देश्य विकासशील देशों को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद करना है ताकि उनकी अर्थव्यवस्था बढ़ सके और गरीबी घटाने में मदद मिल सके। अभी तक 129 देशों को करीब 4,800 सामग्रियों के लिए जीएसपी के तहत फायदा मिलता है। यानी बिना आयात शुल्क उनका सामान अमेरिका में प्रवेश पाता है। ध्यान रखिए, भारत 2017 में जीएसपी कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी था। इसने तब जीएसपी के तहत अमेरिका को 5.7 अरब डॉलर का निर्यात किया था। इससे पहली नजर में यह निष्कर्ष निकलता है कि भारत सबसे ज्यादा लाभ पाता जो इससे छीन गया है। इसे थोड़ा विस्तार से समझें। जीएसपी के तहत केमिकल्स और इंजिनियरिंग जैसे सेक्टरों के करीब 1900 भारतीय उत्पाद को अमेरिकी बाजार में आयात शुक्ल पहुंच हासिल थी। इसमें प्रोसेस्ड फूड, लेदर और प्लास्टिक प्रोडक्ट, बिल्डिंग मैटेरियल प्रोडक्ट, हैंड टूल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, तकिया-कुशन कवर, महिलाओं के बुने हुए कपड़े, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, ऑर्गेनिक केमिकल्स, कृषि, समुद्री और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद आदि शामिल थे। यह कहना तो गलत होगा कि अमेरिका द्वारा जीएसपी के तहत लाभ बंद किया जाना भारत के लिए झटका नहीं है लेकिन उतना बड़ा नहीं जैसा बताया जा रहा है। वाणिज्य सचिव अनूप वधावन का बयान है कि जीएसपी के तहत तरजीही दर्जा वापस लेने का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसके फायदे बहुत ज्यादा नहीं थे। जैसा हमने उपर कहा भारत जीएसपी के तहत 5.7 अरब डॉलर (करीब 39,645 करोड़ रुपये) मूल्य के सामानों का अमेरिका को निर्यात करता रहा है। इससे भारत को सालाना 19 करोड़ डॉलर (करीब 1,345 करोड़ रुपये) का शुल्क लाभ मिलता था। तो इतनी क्षति भारत को होगी। किंतु भारत को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार में प्राप्त लाभ के सामने यह कुछ भी नहीं है। भारत ने 2017-18 में अमेरिका को 48 अरब डॉलर (3,39,811 करोड़ रुपये) मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया था। यह समझने की जरुरत है कि भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक लाभ वाला 11 वां सबसे बड़ा देश है यानी भारत का अमेरिका को निर्यात वहां से आयात से ज्यादा है। 2017-18 में भारत का अमेरिका के प्रति सालाना व्यापार आधिक्य 21 अरब डॉलर (करीब 1,48,667 करोड़ रुपये) था। 2018-19 का जो मोटामोटी आंकड़ा उपलब्ध है उसके अनुसार दोनों देशों के बीच करीब 142 अरब डॉलर का व्यापार हुआ जिसमें करीब 25 अरब डॉलर भारत का ज्यादा था।

अगर इस पूरे परिप्रेक्ष्य का ध्यान रखें तो फिर बहुत ज्यादा हो हल्ला का कोई कारण नहीं दिखेगा। वैसे भी डोनाल्ड ट्रंप अपना व्यापार घाटा कम करने के लिए कई कड़े कदम उठा चुके हैं। तुर्की का जीएसपी दर्जा उन्होंनेे पिछले 19 मई को ही खत्म कर दिया था। चीन के सामानों पर जिस तरह का शुल्क उन्होेंने लगाया है वैसा व्यवहार वे भारत के साथ नहीं कर रहे हैं तो इसके कुछ कारण हैं। दरअसल, अमेरिका भारत को अपना विश्वसनीय सामरिक साझेदार मानता है। नरेन्द्र मोदी की शपथ ग्रहण के बाद ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय ने एक विस्तृत बयान दिया। उसमें पूरे हिन्द प्रशांत क्षेत्र में भारत की महत्ता तथा अमेरिका के लिए संबंधों को उच्च स्थान दिए जाने की बात थी। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो जापान के ओसाका शहर में होेने वाले जी 20 सम्मेलन जाने के रास्ते पहले भारत आएंगे और विदेश मेंत्री एस.जयशंकर से बातचीत करेंगे। कहने का तात्पर्य यही किसी भी घटना को समग्रता में विचार करके ही प्रतिक्रिया व्यक्त किया जाना चाहिए। भारत ने अमेरिका के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण अवश्य कहा, प्रतिक्रिया एकदम सधी हुई थी। भारत ने कहा है कि अमेरिका की तरह भारत और अन्य देश ऐसे मामलों में अपने राष्ट्रीय हितों को सवोर्परि रखते हैं। किसी भी देश के साथ विशेषकर आर्थिक संबंधों के क्षेत्र में मुद्दों का समाधान तलाशना निरंतर प्रक्रिया है। भारत इस मुद्दे को नियमित प्रक्रिया के रूप में देखता है और अमेरिका के साथ सुदृढ संबंधों का भरोसा रखता है। दोनों देश आपसी हितों को देखते हुए द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के लिए काम करते रहेंगे। यह भी ध्यान रखिए कि अमेरिक के एक व्यापार संगठन कोएलेशन फॉर जीएसपी ने भी इसका विरोध किया है। वस्तुतः इससे अमेरिका को भी क्षति होगी। आकलन यह है कि इस फैसले से अमेरिकी कारोबारियों को 30 करोड़ डॉलर के अतिरिक्त कर का भुगतान करना होगा। यह संगठन इस फैसले को रोकने के लिए अभियान चला रहा था। जैसा हमने उपर कहा जीएसपी के तहत भारत मुख्य रूप से सेमी-मैन्युफैक्चर्ड वस्तुओं का निर्यात करता है। इससे अमेरिकी कंपनियों को अपने उत्पाद की लागत कम रखने में मदद मिलती है। भारत को जीएसपी से बाहर करने से अमेरिका में केमिकल उत्पादों के दाम करीब 5 प्रतिशत बढ़ेंगे। संगठन के कार्यकारी निदेशक डान एंथनी ने कहा कि जीएसपी के फायदे खत्म करने से अमेरिका के छोटे कारोबारियों को नया कर देना होगा। इससे नौकरियां जाएंगी, निवेश रद्द होगा और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ेगा। सीनेट और हाउस द्वारा करीब सर्वसम्मति से देश को जीएसपी के तहत मिल रहे लाभ को तीन साल तक के लिए बढ़ाने के महज एक वर्ष बाद ट्रंप सरकार ने ऐसे देश का जीएसपी दर्जा समाप्त कर दिया है, जो अमेरिकी कंपनियों का सबसे अधिक धन बचाता है। वस्तुतः जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिका का दो-तिहाई आयात होता है। इसमें उत्पादों के विनिर्माण के लिए कच्चे माल और कलपुर्जे शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कई महंगे सामान पर शुल्क समाप्त हो जाता है। 2016 और 2017 में जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी आयातकों को 73 करोड़ डॉलर की बचत हुई। इससे अमेरिकी कंपनियों ने 89.4 करोड़ डॉलर बचाए। तो क्षति अमेरिका को भी है। वैसे अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने पिछले ही वर्ष जीएसपी दर्जा तीन वर्ष तक कायम रखने का प्रस्ताव पारित किया था। बहरहाल, हमेें जीएसपी मामले पर किसी तरह की अतिवादी प्रतिक्रिया से बचना चाहिए।

अवधेश कुमार, ईः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेस, दिल्लीः110092, दूरभाषः01122483408, 9811027208

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