चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर दम तोड़ने वाले शिक्षकों के आश्रितों को मिले सरकारी नौकरी और एक करोड़ मुआवज़ा : शकील मलिक

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नई दिल्ली:आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश सह-प्रभारी व अध्यक्ष माइनॉरिटी विंग,शकील मलिक ने चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण की जद में आकर दम तोड़ने वाले सैकड़ों शिक्षा कर्मियों का मुद्दा उठाया उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि योगी सरकार शिक्षाकर्मियों के परिवारजनों की भावनाओं से खेलना बंद करके, योगी सरकार को प्राथमिक शिक्षक संघ की सूची स्वीकार करनी चाहिए। 1621 लोगों की सूची के सापेक्ष पहले मात्र 03 और अब 1200 लोगों की मौत का आंकड़ा जारी करने की बजाए, सरकार सभी शिक्षकों के परिवारों को 01 करोड़ का मुआवज़ा दे। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले ही सरकार से एक करोड़ रुपये के मुआवज़ा देने की मांग उठाई थी। उक्त धनराशि सहित पीड़ित परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की थी। सैकड़ों मौतें योगी सरकार की चुनावी ज़िद का नतीजा है जिसके परिणाम स्वरूप ये मौते हुईं, लेकिन कोरोना संक्रमण के बीच पंचायत चुनाव कराकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांव-गांव तक महामारी फैलाकर अब इसे छिपाने में लगे हैं। सीएम योगी की जिद के कारण सैकड़ों परिवार का जीवन खतरे में पड़ा। हाईकोर्ट भी योगी सरकार को इस जिद के लिए लताड़ चुका है कि चुनावी ड्यूटी के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का सही तरीके से निर्वाह नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि राज्य निर्वाचन आयोग की लापरवाही के कारण कई शिक्षामित्र, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आदि की मौत हो चुकी है और उनके परिवार के लोग सांसों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।  आम आदमी पार्टी शिक्षामित्रों और कर्मचारियों के साथ खड़ी है। जिन कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हुई है, उनके परिजनों को सरकारी नौकरी और एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी दी जाए। आम आदमी पार्टी की मांग है कि कर्मचारियों के संक्रमित परिजनों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए। इसी क्रम में पार्टी के पदाधिकारी पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें भरोसा दे रहे हैं कि उन्हें न्याय दिलाने की लड़ाई में पार्टी उनके साथ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील है कि अगर उनमें जरा भी संवेदना शेष है तो पंचायत चुनाव में महामारी का शिकार होने वाले शिक्षकों के परिवारों का मज़ाक बनाना बंद करके और आंकड़ों का यह खेल बंद करें। शिक्षक संघ की 1621 शिक्षकों की सूची स्वीकारते हुए सभी परिवारों को 30 लाख की जगह एक करोड़ का मुआवज़ा और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की अविलंब घोषणा करें।
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