राफेल डील पर फ्रांस में जांच शुरू , रंजन गोगोई ने साधी चुप्पी, मीडिया पूछता रहा सवाल नहीं मिला जवाब

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राफेल डील पर फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और वर्तमान में राज्यसभा के सांसद रंजन गोगोई ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है।

द टेलीग्राफ की खबरों को आधार मानें तो पूर्व चीफ जस्टिस से जब राफेल डील के मसले पर नए फ्रांसीसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो वह मौन हो गए।

मालूम हो कि वर्ष 2018 में राफेल सौदे की जांच के लिए दायर याचिका को जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने खारिज कर दिया था।

अब जब राफेल घोटाले की फ्रांस में नए तरीके से जांच शुरु हो गई है, वैसे में सवाल रंजन गोगोई पर भी उठने लगे हैं।

न सिर्फ रंजन गोगोई के फैसले पर बल्कि रंजन गोगोई के चरित्र पर भी क्योंकि जिस तरह से उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा के सांसद बन गए, उससे न्यायपालिका की गरिमा तो गिरी ही, चीफ जस्टिस जैसे पद की गरिमा भी कम हुई।

बताते चलें कि इस मामले में फैसला देने के ठीक 04 महीने के बाद ही गोगोई राज्यसभा पहुंच गए थे।

देश के जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने राफेल डील में भ्रष्टाचार के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल किया था और इस डील में जांच की मांग की थी लेकिन जस्टिस रंजन गोगोई ने इस बात से इंकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया था. केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा के लिए यह एक जश्न जैसा फैसला था….

जैसे ही दो दिन पहले फ्रांस में इस मामले की जांच के लिए एक जज की नियुक्ति हुई, वैसे ही भारत में भी राजनीतिक उथल पुथल तेज हो गई है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष एक बार फिर से मोदी सरकार पर हमलावर हो गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मामले पर सवाल दागते हुए कहा है कि ये कैसे हो सकता है कि जब किसी सौदे में दो पक्ष शामिल हो, और एक तरफ इसकी न्यायिक जांच शुरु हो गई है तो दूसरा पक्ष अब चुप क्यों रह सकता है !

खेड़ा ने कहा कि हम पहले से कहते आ रहे हैं कि ये पूर्ण रुप से भ्रष्टाचार का मामला है।

वहीं राफेल घोटाले को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमलावर रहे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने चौकीदार चोर है के बाद चोर की दाढ़ी में नया नारा उछाल दिया है।

राफेल घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आने के बाद जहां विपक्ष पुनः आक्रामक मोड में आ गया है तो सरकार की ओर से रक्षात्मक रुख अख्तियार कर लिया गया है। प्रधानमंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक खामोश की मुद्रा में आ गए हैं।

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