तालिबान को बड़ा झटका, विद्रोहियों ने तीन ज़िले को तालिबान के चंगुल से किया आज़ाद

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तालिबान को लेकर एक खबर अफगानिस्तान से आ रही है जहाँ उसके कब्ज़े को धता बताते हुए विद्रोहियों ने तीन जिलों को तालिबान के चंगुल से आज़ाद करा लिया है. यह एक बहुत बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. इन जिलों के नाम हैं पोल-ए-हेसर, हेड सहाल और बानो.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस लड़ाई में कई तालिबान लड़ाके भी मारे गए हैं.

कहा जा रहा है कि इस वक्त तालिबान के तकरीबन सभी बड़े नेता राजधानी काबुल में है.

विभिन्न इलाकों के कमांडर भी अपनी पोजीशन मजबूत करने और टॉप लीडरशिप से नजदीकी बढ़ाने के लिए काबुल में ही हैं. इस कारण विभिन्न इलाकों में तालिबान लड़ाके नेतृत्वविहीन स्थिति में हैं. इसी का फायदा स्थानीय विरोधी गुट उठा रहे हैं.

इस बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी कहा है-तालिबान का शासन पूरे अफगानिस्तान पर नहीं है. उन्होंने माना है कि पंजशीर प्रांत में सशस्त्र विद्रोह की शुरुआत हो चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पंजशीर में अफगान सेना के प्रशिक्षित जवान इकट्ठा हो रहे हैं.

इनमें अफगान स्पेशल फोर्स के भी जवान हैं जिन्हें वहां सबसे बेहतर सैनिकों में गिना जाता है.

इससे पहले खबर आई थी कि पंजशीर में तालिबान विरोधी गुट मजबूत होने लगा है. अफगानिस्तान में ताजिक मूल के लोगों में हीरो के तौर पर पहचान रखने वाले अहमद शाह मसूद के बेटे अमहद मसूद इस विद्रोह के अगुवा हैं. मसूद के साथ खुद को अफगानिस्तान का केयरटेकर राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्लाह सालेह भी इसके नेता हैं. लेकिन अब इन दोनों के साथ एक ऐसे वारलॉर्ड का नाम भी शामिल हो गया है जिसे तालिबान के खिलाफ पटखनी देने के लिए पहचाना जाता है. अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति और देश के ताकतवर वारलॉर्ड अब्दुल रशीद दोस्तम के भी विरोधी गुट में शामिल होने की खबरें हैं.

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