कोविशील्ड का टीका लेने वाले यात्रियों को यूरोपीय संघ नहीं देगा ग्रीन पास ,पत्रकार बोले ये मोदी जी कृपा है

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ये लीजिए…….
कल खबर आयी थी कि कोविशील्ड का टीका लेने वाले यात्रियों को यूरोपीय संघ का वेक्सीन पासपोर्ट यानी “ग्रीन पास” नहीं दिया जाए़ !……….जानते है कि इसमे सबसे गलती किसकी है ? इसमे पूरी गलती मोदी सरकार ओर सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला की है
दरअसल भारत में निर्मित एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन कोविशील्ड अदार पूनावाला के सीरम इंस्टीट्यूट पूना में बनती है उन्होंने ग्रीन पास की व्यवस्था के लिए यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) के पास एप्लाई ही नही किया है
जी हाँ सीरम ने यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) द्वारा अनुमोदित वैक्सीन के लिए आवेदन ही नहीं किया है साइंस मैगजीन द वायर साइंस से ईएमए से जब बात की तो पता चला कि सीरम की तरफ से अब तक कोविशील्ड के लिए कोई अनुमोदन आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
आप कहेंगे कि एस्ट्राजेन्का के टीके जो वैक्सजेवरिया (ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका) के नाम से यूरोप में मिल रहे हैं उन्हें तो अनुमति दी गई है फिर उसी फार्मूले पर बनी कोविशील्ड को अनुमति क्यो नही दी गई है तो दरअसल बात यह है कि ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका COVID-19 वैक्सीन – वैक्सज़ेवरिया मुख्य रूप से तीन फर्मों द्वारा निर्मित की जाती है: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया,दक्षिण कोरिया में एस.के. बायोसाइंसेज और इसके अलावा एस्ट्राजेनेका की चार विनिर्माण साइटें।
EMA ने ग्रीन पास के लिए नियम बनाया है कि यदि वेक्सीन का फार्मूला एक ही हो तो भी टीके के विभिन्न निर्माताओं को अलग-अलग आवेदन जमा करने होंगे। इसका एक कारण यह है कि अनुमोदन प्रक्रिया में विनिर्माण सुविधाओं का निरीक्षण शामिल है।
साफ है कि यदि सीरम EMA के पास अप्लाई ही नही करेगा तो EMA कैसे स्वंय से पूना आकर सीरम इंस्टिट्यूट की मैन्यूफैक्चरिंग प्रक्रिया की जाँच करेगी ?
दूसरी बात यह है कि सीरम इंस्टीट्यूट ने अभी तक 57 दिनों के बाद भी अपने यहाँ हुए ट्रायल का पूरा डेटा प्रकाशित नहीं किया है……
अगर मोदी सरकार एस्ट्राजेन्का की सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा उत्पादित वेक्सीन का अब तक पूरा श्रेय ले रही थी तो अब उसे इस गलती को भी स्वीकार करना चाहिए…….

पत्रकार गिरीश मालवीय के वाल से साभार

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