लक्षद्वीप: आयशा सुल्ताना पर लगाए गए राजद्रोह के मुकदमे के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने दी इस्तीफ़ा

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कोच्चि: लक्षद्वीप में भारतीय जनता पार्टी के एक दर्जन से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्थानीय निवासी और फिल्म निर्माता आयशा सुल्ताना के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दायर करने के विरोध में शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी की लक्षद्वीप इकाई के अध्यक्ष अब्दुल खादर हाजी की शिकायत के आधार पर कवरत्ती पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 124 A (राजद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

खादर ने अपनी शिकायत में लक्षद्वीप को लेकर एक मलयालम चैनल ‘मीडियावन TV ’ पर हाल ही में हुई डिबेट का उल्लेख किया है, जिसमें आयशा ने कथित तौर पर कहा था कि केंद्र सरकार प्रफुल्ल पटेल को लक्षद्वीप पर ‘जैविक-हथियार’ के रूप में इस्तेमाल कर रही है.

चर्चा केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के विवादास्पद प्रस्तावों से संबंधित थी, जिसके कारण लक्षद्वीप पर चौतरफा विरोध को जन्म दिया है.

अपने त्याग पत्र में बीजेपी पदाधिकारियों ने कहा कि आयशा सुल्ताना के खिलाफ हाजी के आरोप असत्य थे और ऐसा उन्हें और उनके परिवार के भविष्य को बर्बाद करने के उद्देश्य से किया गया था.

उन्होंने यह कहते हुए उनका बचाव किया कि वह केवल लक्षद्वीप के लोगों के अधिकारों के लिए बोल रही थीं. नेताओं ने यह भी कहा कि पूरी बीजेपी इकाई प्रशासक पटेल की ‘लोकतंत्र विरोधी, जनविरोधी और भयानक नीतियों की दुष्टता’ से अवगत थी.

पार्टी से इस्तीफा देने वालों में भारतीय जनता पार्टी के राज्य सचिव अब्दुल हामिद मुल्लीपुरा, वक्फ बोर्ड के सदस्य उम्मुल कुलूस पुथियापुरा, खादी बोर्ड के सदस्य सैफुल्ला पक्कियोडा, चेतलाट इकाई के सचिव जाबिर सलीहथ मंजिल और पार्टी कार्यकर्ताओं के एक समूह शामिल हैं.

बता दें कि मुस्लिम बहुल आबादी वाला लक्षद्वीप हाल ही में लाए गए कुछ प्रस्तावों को लेकर विवादों में घिरा हुआ है. वहां के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को हटाने की मांग की जा रही है.

पिछले साल दिसंबर में लक्षद्वीप का प्रभार मिलने के बाद प्रफुल्ल खोड़ा पटेल लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन के मसौदे ले आए हैं, जिसका तमाम विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं.

इन कानूनों में बेहद कम अपराध क्षेत्र वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में एंटी-गुंडा एक्ट और दो से अधिक बच्चों वालों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का भी प्रावधान भी शामिल है.

इससे पहले लक्षद्वीप के साथ बेहद मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रखने वाले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के साथ वामदलों और कांग्रेस के सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री मोदी को इस संबंध में पत्र भी लिखा था.

केरल विधानसभा ने लक्षद्वीप के लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए 24 मई को एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया, जिसमें द्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को वापस बुलाए जाने की मांग की गई और केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया था, ताकि द्वीप के लोगों के जीवन और उनकी आजीविका की रक्षा हो सके.

इस हफ्ते की शुरुआत में लक्षद्वीप के निवासियों ने जनविरोधी कदम उठाने के मुद्दे पर प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को वापस बुलाने और मसौदा कानून को रद्द करने की मांग को लेकर पानी के भीतर विरोध प्रदर्शन करने के साथ अपने घरों के बाहर 12 घंटे का अनशन भी किया.

प्रदर्शनकारियों ने ‘लक्षद्वीप फोरम बचाओ’ के बैनर तले अरब सागर के भीतर और अपने घरों के बाहर ‘एलडीएआर कानून वापस लो’ तथा ‘लक्षद्वीप के लिए न्याय’ लिखी हुईं तख्तियां प्रदर्शित की और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा की.

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