मुख्यमंत्री रहते हुए अपने बेटे के ईलाज़ के लिए आम आदमी की तरह लाइन में खड़े रहते थे लालू प्रसाद यादव

नई दिल्ली ( jjpnews) आज एक ऐसे व्यक्ति का जन्मदिन है जो अपनी वाक्यपटता और गवई अंदाज़ से दर्शकों और श्रोताओं को हँसाते हँसाते लोट पोट कराने में माहिर हैं। उनके बोल और जुमले सुन कर या उनके बोलने के अंदाज़ पर बस आपकी मुस्कान ना रुक पाए। यह उनकी खुद की बहुत करीने से बनाई गई छवि है जिनके पीछे बहुत ही चतुर और प्रखर दिमाग। आज जिसकी हम बात कर रहे हैं वह है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव

आज लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन है तो आइए उनके जीवन के कुछ ऐसी बातें आपको बताए जिसे शायद आपने भी नहीं सुनी हो। लालू प्रसाद एक ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने अपने सरकार के चपरासी को दिए गए 2 कमरे के सरकारी निवास से राज्य का साशन चलाया। और वह बिहार के इतिहास में पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जो बुखार में तप रहे अपने बेटे का इलाज कराने के लिए पटना मेडिकल कॉलेज में आम लोगों की लाइन में खड़े हुए और अपने बारी का इंतेज़ार किया।

मशहूर पत्रकार शंकर ठाकुर अपनी किताब “स्वाल्टन साहिब बिहार एंड द मेकिंग लालू यादव” में लिखते है की बिहार के एक मशहूर रिटायर्ड अफसर ने बताया कि शुरुआत में लालू एक अनोखे प्राणी की तरह थे जो हर एक से टकराने के फिराक में रहते थे। आपको समझ नहीं आता था कि आप उन्हें देखते रहे या उनको रोकने के लिए कुछ करें। वह एक अजीब सी बोली बोलते थे जिसमें हिंदी और भोजपुरी का मिश्रण रहता था उसमें कहीं कहीं गलत जगह पर एक आध अंग्रेजी के शब्द भी घुसा देते थे। यह चौंकाने वाली बात थी कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह अपने भाई के चपरासी वाले घर मे रह रहे थे। हमने उनसे कहा भी इससे प्रशासनिक और सुरक्षा की दिक़्क़त पैदा होगी और वेटनरी कॉलेज में रहने वालों की ज़िंदगी भी मुश्किल हो जाएगी लेकिन हर बार वह यही जवाब देते थे कि हम चीफ मिनिस्टर है हम सब जानते है जैसा हम कह रहे हैं वैसा कीजिए।

लालू प्रसाद यादव ने पहली बार जूता तब पहना था जब उन्होंने NCC जॉइन किया था जूता नहीं पहनने की वजह से उनके उंगलियों के बीच खासा गैप पैदा हो गया था। लालू की याददाश्त बहुत ज़बरदस्त थी एक बार जिससे मिल लेते उनका नाम और चेहरा कभी नहीं भूलते थे।

तमाम विवादों से जुड़े रहने के बाद भी उनकी लोकप्रियता का राज है आम लोगों से उनका जुड़ाव, वह अपना हेलीकॉप्टर बीच खेत मे उतार देते थे और लोगों को अपने साथ हेलीकॉप्टर में चक्कर लगवाते थे। और वह अपने गाड़ियों के काफिलों को बीच सड़क पर रोक कर बच्चों के बीच टॉफी बांटते थे। और कभी कभी गरीब किसान के घर पहुंच कर खाना खाने की फरमाइश करते थे उनके बच्चों के साथ गाना गाते और मर्दों से पूछते थे खैनी है तुम्हारे पास।

लालू प्रसाद यादव का यही अंदाज़ तो है जिसकी वजह से वह बिहार ही नहीं देश भर में करोड़ों लोगों के दिलों ओर राज़ करते है।

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