आपसी सुलह से बाबरी मस्जिद का हल हो जाए तो इससे बेहतर कुछ नहीं :मौलाना अरशद मदनी

Noah's court acquitted 57 foreign jamati, ordered to be sent to their country

नई दिल्ली: बाबरी मस्जिद विवाद मामले की आज सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में सुनवाई हुई । इस प्रगति पर अपने प्रतिक्रिया वयक्त करते होए सदर जमीअत उलेमा हिंद मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि अगर कोई विवाद या समस्या बातचीत और आपसी सुलह से हल हो जाए तो इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता। साथ ही बातचीत या निर्णय आस्था के आधारित पर नहीं बल्कि सबूत के आधार पर होने चाहिए। उन्होंने कोर्ट के एक पिछले टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि अदालत शुरुआत से ही स्पष्ट कर चुकी है कि यह आस्था नहीं बल्कि सुबूत का मामला है।

मौलाना सैयद अरशद मदनी ये भी कहा कि सुलह समिति ने बंद लिफाफे में गोपनीय रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है, जिसमें पर चीफ जस्टिस ने कमीटी को और 13 दिन की मोहलत दी है, इसलिए हमें अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार हम नेमसालहती प्रक्रिया में भाग लिया था, इसलिए हम रिपोर्ट की प्रतीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि दो अगस्त को इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जिसके दौरान यह फैसला हो जाएगा कि क्या सुलह हुई या नहीं, इसके बाद अदालत अंतिम चर्चा के लिए आदेश जारी कर सकती है

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