असम सीमा पर विवाद के बाद मिज़ोरम सरकार ने प्रधामंत्री मोदी से राष्ट्रीय राजमार्ग खुलवाने की मांग

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नई दिल्ली :अंतर राज्यीय सीमा पर हाल में हुई झड़प के बाद असम की बराक घाटी के लोगों द्वारा शुरू किए गए आर्थिक अवरोध को समाप्त करने के लिए मिजोरम सरकार ने प्रधामंत्री मोदी से हस्तक्षेप की मांग की.

अंतरराज्यीय सीमा पर हुई झड़प में असम पुलिस के 6 पुलिसकर्मियों समेत सात लोग मारे गए थे और एक पुलिस अधीक्षक सहित 50 से ज्यादा घायल हो गए थे.

केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को लिखे पत्र में मिजोरम के गृह सचिव ललबियकसांगी ने कहा कि राज्य को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 306 को 26 जुलाई से अवरुद्ध किया गया है.

पत्र में कहा गया, इस अवरोध से मिजोरम के लोगों की आजीविका पर विपरीत असर पड़ रहा है. मिजोरम और असम को जोड़ने वाले अन्य मार्गों पर यातायात का आवागमन भी असम के अंदर रुका गया है.

पत्र में कहा गया, ऐसी भी खबरें हैं कि असम से अज्ञात बदमाशों ने असम के हैलाकांडी जिले में मोहम्मदपुर और रामनाथपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे की पटरियां क्षतिग्रस्त कर दी हैं, जो मिजोरम के कोलासिब जिले में बैराबी रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली एकमात्र रेलवे लाइन है.

राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन मोदी सरकार के स्वामित्व में हैं और राज्य सरकार की किसी एजेंसी या आम जनता को उन्हें अवरुद्ध करने तथा लोगों का आवागमन रोकने का कोई अधिकार नहीं है.

पत्र ने कहा कि , इस संबंध में मोदी सरकार से अनुरोध किया जाता है कि वह हस्तक्षेप करे और असम सरकार को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया जाए ताकि अवरोध को तत्काल हटाया जा सके और राष्ट्रीय राजमार्ग तथा रेलवे लाइन पर यात्रियों और सामान की आवाजाही बहाल हो सके.

दरअसल, असम की बराक घाटी में प्रदर्शनकारियों द्वारा बंद लागू किए जाने और सीमा पर हिंसा की आशंका के चलते मिजोरम को एक प्रकार की नाकाबंदी झेलनी पड़ी है जहां प्रदर्शनकारी सुनिश्चित कर रहे हैं कि पड़ोसी राज्य जा रहे ट्रक अंतरराज्यीय सीमा से पहले रोक लिए जाएं.

दोनों राज्यों के सशस्त्र पुलिस बल सीमा के पास है, जहां सोमवार को सशस्त्र संघर्ष होने के साथ ही कुछ जानें भी गईं थीं. हालांकि, अधिकारियों ने पुष्टि किए है. कि शांति स्थापित करने की कोशिश में बल कम से कम 100 मीटर पीछे हट गए हैं.

असम और मिजोरम पुलिस बलों के बीच अंतरराज्यीय सीमा पर हुई झड़प में 6 पुलिसकर्मियों समेत सात लोगों की मौत की घटना पर विरोध जाहिर करने के लिए आहूत 12 घंटे के बंद से असम की बराक घाटी के तीन जिलों में जनजीवन बुधवार को बुरी तरह प्रभावित हुआ.

बराक घाटी में सुबह पांच बजे से प्रभावी बंद के मद्देनजर सभी कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और बहुत कम वाहन मिजोरम की सीमा से सटे कछार, हैलाकांडी, और करीमगंज जिलों की सड़कों पर दिखे जबकि आपातकालीन सेवाओं को रियायत दी गई थी.

हालांकि, उत्तरपूर्व सीमांत रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि ट्रेन सेवाएं अब तक अप्रभावित हैं.

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बराक डेमोक्रेटिक फ्रंट (BDF) द्वारा बुलाए गए और विपक्षी एआईयूडीएफ(AIUDF) समेत राजनीतिक संगठनों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा समर्थित बंद पूर्ण था और किसी जिले से किसी तरह की अप्रिय घटना सामने नहीं आई है.

बीडीएफ (BDF) के मुख्य समन्वयक प्रदीप दत्ता रे ने कहा कि लोगों ने अनायास ही बंद को समर्थन दिया है.

उन्होंने कहा, हमें मजबूरन यह बंद आहूत करना पड़ा क्योंकि हमारे पुलिसकर्मियों की मौत हुई है और विवाद का स्थायी समाधान होना चाहिए क्योंकि हम और खून-खराबा नहीं चाहते हैं.

हैलाकांडी जिले में कई सामाजिक संगठनों ने मिजोरम जाने वाली सड़कों को बाधित कर दिया और पड़ोसी राज्य तक जाने वाले मालवाहक ट्रकों की आवाजाही को रोकने के लिए अनिश्चितकालीन ‘आर्थिक अवरोध शुरू कर दिया.

असम पुलिसकर्मियों ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को मिजोरम सीमा के पास जाने से रोका
असम पुलिस ने मिजोरम से लगती राज्य की सीमा पर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को जाने से रोक दिया. अंतर राज्यीय सीमा पर हाल में हिंसक झड़प हुई थी. पुलिस ने कहा कि किसी को भी सीमा के पास जाने की अनुमति नहीं है क्योंकि अब वह अशांत क्षेत्र बन गया है.

कांग्रेस की राज्य इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष भूपेन बोरा के नेतृत्व में गए पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को अंतर राज्यीय सीमा से आठ किलोमीटर दूर कछार जिले के धोलाई पुलिस थाने के पास रोक दिया गया.

इसके विरोध में पार्टी के नेता कुछ देर तक सड़क पर बैठे रहे. बोरा के अलावा, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव, कांग्रेस विधायक दल के नेता देवव्रत सैकिया, विधानसभा में उप नेता रकीबुल हुसैन और कार्यकारी अध्यक्ष कमलाख्या डे पुरकायस्थ प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे. पुरकायस्थ, बराक वैली में करीमगंज उत्तर की सीट से विधायक हैं.

बोरा ने धोलाई में संवाददाताओं से कहा, हम यहां अंतर राज्यीय सीमा पर स्थिति का जायजा लेने के लिए आए हैं ताकि इससे निपटने में सरकार की मदद कर सकें और लोगों को हकीकत बता सकें.

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