मोदी भक्ति ने तुम्हें कहां पहुंचा दिया है कि तुम्हें भ्रष्टाचारियों की पैरवी करनी पड़ रही है

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हमारे तीन सवालों का जवाब दे दो, अगर बिल्कुल तर्क संगत जवाब दे दोगे तो फिर हम राम मंदिर भूमि घोटाले पर कुछ नहीं लिखेंगे।
एक दावा तो यह किया जा रहा है कि एग्रीमेंट 11 साल पहले हो गया था। यहां हमारा पहला सवाल पैदा होता है।
ये चमत्कारी एग्रीमेंट किस कानून के तहत हुआ था कि 11 साल तक प्रभावी बना रहा, खत्म नहीं हुआ?
भाजपा के राज्यसभा सदस्य श्री सुभाष चंद्रा के समाचार चैनल जी न्यूज पर भाजपा के महान प्रवक्ता श्री संबित पात्रा ने कहा, 11 साल पहले एग्रीमेंट हुआ, उसके तीन साल बाद दुबारा एग्रीमेंट हुआ, क्योंकि पहले वाला एग्रीमेंट एक्सपायर हो गया था। तीन साल बाद जब ये दूसरा एग्रीमेंट खत्म हो गया तो फिर तीसरा हुआ।
इसका मतलब ये तो है कि संबित को पता था कि एग्रीमेंट तीन साल से ज्यादा नहीं चलता। हो यह भी सकता है कि टीवी पर जाने से पहले उन्होंने किसी विद्वान से एग्रीमेंट के बारे में जानकारी हासिल कर ली हो, लेकिन यहां हमारा दूसरा सवाल पैदा हो गया।
जमीन के उन मालिकों की ऐसी क्या मजबूरी थी कि एग्रीमेंट एक्सपायर होने के बाद भी उन्होंने अपनी जमीन की बढ़ी हुई कीमत नहीं मांगी और पुराने रेट में ही तीन-तीन साल के अंतराल पर तीन बार एग्रीमेंट और कर दिया?
ये तो तथ्य ही है कि जमीन के मालिकों ने 11 साल पुराने रेट पर बैनामा किया। ये बैनामा होने के दो-पांच मिनट बाद बैनामा कराने वालों को साढ़े 18 करोड़ रुपए देकर जमीन मंदिर ट्रस्ट ने खरीद ली। यहां हमारा तीसरा सवाल पैदा हो गया है।
मंदिर ट्रस्ट ने जमीन के मालिकों से सीधी रजिस्ट्री क्यों नहीं कराई? उस दूसरी पार्टी को बीच में क्यों घुसाया गया, जिसके नाम जमीन के मालिकों ने बैनामा किया?
अगर इन तीन सवालों के तर्क संगत जवाब नहीं हैं तो एक काम करना…।
समय निकालकर विचार करना कि मोदी भक्ति ने तुम्हें कहां पहुंचा दिया है कि तुम्हें भ्रष्टाचारियों की पैरवी करनी पड़ रही है। और भ्रष्टाचारी भी ऐसे वैसे नहीं, राम जी को धोखा देने वाले भ्रष्टाचारी।
#हरिबोल

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