57 डिग्री तापमान में भी रोज़ा नही छोड़ता रेलवे ड्राइवर,सिग्नल और क्रॉसिंग पर पढ़ता है नमाज

रमजान उल मुबारक के मुक़द्दस महीने में झुलसा देने वाली गर्मी में कोई भी रोज़ेदार घर से निकलना नही चाहेगा लेकिन मजबूरी में निकलना पड़ता है,15 घण्टे के लम्बे रोज़े में 42 डिग्री तापमान साथ साथ गर्म हवा के झुलसा देने वाले झोंके रोज़े की शिद्दत बढ़ा देती है।

गर्मी कितनी भी है लेकिन मोमिन फर्ज अदा करने के लिये रोज़ा रखकर बाहर निकलते हैं,कुछ नौकरी पेशा ऐसे हैं जो दिनभर कड़ी तेज धूप में सड़क पर खड़े होकर ट्रैफिक कंट्रोल करते हैं तो कोई 57 डिग्री गर्म रेल इंजन में रोजा रखकर ट्रेन चलाता है। ऐसे भी लोग हैं जो तपा देने वाली गर्मी में रोजा रख कर सिटी बस से सवारियों को एक जगह से दूसरी छोड़ रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोजा रखने वाले ऐसे कर्मचारी अपने फर्ज को लेकर प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे लिए फर्ज बहुत अहम हैं।

पूर्वोत्तर रेलवे में तैनात लोको पायलट मोहम्मद मुईनुद्दीन अंसारी रेल इंजन के भीतर 57 डिग्री तापमान में रोज़ा रखकर अपना फर्ज निभा रहे हैं,क्योंकि इंजन के अंदर बाहर से ज़्यादा गर्मी रहती है,इस बारे में मुइनुद्दीन ने बताया कि वो पिछले 15 सालों से नौकरी करते हुए रोज़ा रखते हुए आरहे हैं।

मुईनुद्दीन अंसारी ने कहा कि बाहर के तापमान से लोको इंजन की गर्मी बहुत अधिक होती है लेकिन अल्लाह के पसंदीदा महीना रमजान भी बस तीस दिन का होता है। असिस्टेंट लोको पायलट महमूद अयाज सिद्दीकी बताते हैं कि रोजे में सिर पर पानी से भीगे दो-दो गमछे रख कर ट्रेन चलानी पड़ती है। थोड़ी समस्या होती है, लेकिन यह हमारा फर्ज है।

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