राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस :बेरोजगारी का डेटा देखना है तो अपने घर के खिड़की खोलिए और सड़क पर झांकिए ,आप समझ जाएंगे

आखिर क्यों ट्रेन्ड कर रहा है #NationalUnemploymentDay #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस

वेतनभोगी मध्य वर्ग को पहली बार मोदी सरकार के जुमलों की असलियत का भान हुआ है……भारतीय राजनीति के इतिहास में यह बड़ा क्षण बन सकता है यदि इस आंदोलन को सही दिशा दी जाए तो!………..

दअरसल यह पहली बार हुआ है कि पिछले कुछ महीनो रोजगार गंवाने वालों में सबसे बड़ी संख्या वेतनभोगी कर्मचारियों की रही है अभी तक यह हो रहा था कि ज्यादातर असंगठित क्षेत्र से जुड़े रोजगार जा रहे थे और उस पर कोई संवेदना नही उभर के आती थी क्योंकि सब बिखरा हुआ था, पिछले कुछ वर्षो से यही चलन में आ गया था…..

ऐसा नही है कि हल्ला नही मचता था !…बात तो होती थी पर एक व्यापक परिदृश्य सामने नही आ पाता था और तमाम बातें भावनात्मक मुद्दों के उभार में दबकर रह जाती थी……… लेकिन इस बार लॉक डाउन के बाद पहली बार मध्य वर्ग को सालो से अपनी जमी जमाई नोकरिया जाती हुई दिखी है या उनके वेतन भत्तों में बड़े पैमाने पर कटौती हुई है…….. प्राइवेट सेक्टर में ऐसे चंद ही खुशनसीब होंगे जिनके वेतन पर असर नही पड़ा वरना हर कोई बेरोजगारी को हीट को इस बार महसूस कर ही रहा है

जो डेटा हमारे सामने आए है वो बता रहे हैं कि अगस्त के अंत तक करीब 2.1 करोड़ वेतनभोगी कर्मचारी नौकरी गंवा चुके हैं। वर्ष 2019-20 में वेतनभोगी रोजगार की संख्या 8.6 करोड़ थी लेकिन अगस्त 2020 में यह संख्या 6.5 करोड़ ही रह गई है। नौकरियों में आई 2.1 करोड़ की गिरावट सभी तरह के रोजगारों में आई सबसे बड़ी गिरावट है।……आश्चर्यजनक रूप से दिहाड़ी मजदूरी की संख्या भी बढ़ गयी साफ बात यह हुई कि लोग जमी जमाई नोकरी से निकल कर दिहाड़ी मजदूर बन गए

सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के आँकड़ों के अनुसार छह सितंबर वाले सप्ताह में भारत की शहरी बेरोज़गारी दर 8.32 फ़ीसदी के स्तर पर चली गई…….इतनी अधिक बेरोजगारी भारत मे कभी भी महसूस नही की गयी है जितनी कि इस वक्त महसूस की जा रही है……

इस बेरोजगारी को देखने के लिए इस बार आपको किसी डाटा विशेषज्ञ की जरूरत नही है बस अपने घर के खिड़की दरवाजे खोल कर बाहर सड़क पर झाँकने की जरूरत है आप समझ जाएंगे कि क्यो मोदी के जन्मदिन पर युवा #NationalUnemploymentDay को ट्रेन्ड करवा रहा है……अगर मैं गलत नही हूँ तो यह हीट आने वाले विधानसभा चुनावों में महसूस होंगी ही होंगी ……….

गिरिश मालवीय


 

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