जम्मू-कश्मीर में अब पथराव करने वालों के पास न पासपोर्ट होगा न नौकरी

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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अब पत्थरबाजों को पासपोर्ट या सरकारी योजनाओं या नौकरियों के लिए सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार करने का फैसला किया है। रविवार को यह निर्देश वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, आपराधिक जांच विभाग (CID), विशेष शाखा-कश्मीर (SBK) द्वारा एक परिपत्र के माध्यम से जारी किया गया।

आदेश में अपनी सभी फील्ड इकाइयों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कागजात के सत्यापन के दौरान, कानून और व्यवस्था, पथराव और राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक अन्य अपराधों में व्यक्ति की संलिप्तता को विशेष रूप से देखा जाए और स्थानीय पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि की जाए।

आदेश में फील्ड स्टाफ को सत्यापन के लिए पुलिस, सुरक्षा बलों और सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में उपलब्ध CCTV फुटेज, फोटो, वीडियो और ऑडियो क्लिप, क्वाडकॉप्टर इमेज जैसे डिजिटल साक्ष्य देखने का भी निर्देश दिया। सर्कुलर में निर्देश दिया गया है, इस तरह के किसी भी मामले में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा मंजूरी से वंचित किया जाना चाहिए।

यह आदेश जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सेवा नियमों में संशोधन के एक महीने बाद जारी किया गया और नए रंगरूटों के लिए पिछले पांच वर्षों में उपयोग किए गए मोबाइल फोन नंबर, ससुराल वालों के बारे में जानकारी, स्वामित्व और उपयोग किए गए वाहनों की पंजीकरण संख्या का विवरण, शैक्षणिक योग्यता का विवरण और दो महीने के भीतर ऋण का विवर णप्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया।

हालांकि नेशनल कांफ्रेस के नेता उमर अब्दुल्ला ने की आदेश की निंदा की। उन्होने नेकां एक प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट अदालत में दोषी पाए जाने का विकल्प नहीं हो सकती है। उन्होंने ट्वीट किया, पुलिस ने उनकी पीएसए हिरासत को सही ठहराने के लिए एक प्रतिकूल रिपोर्ट बनाई थी, जो कानूनी चुनौती के लिए कभी खड़ी नहीं होती।

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