बिहार में मुस्लिम मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर, भाजपा और जदयू में शुरू हुई राजनीतिक खींचतान

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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा आईएएस अधिकारी अमीर सुभानी को मुख्य सचिव नियुक्त करने के फैसले को राज्य में उनके गठबंधन सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के लिए एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. साथ ही JDU के वरिष्ठ नेता कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री कभी भी जाति और धर्म के आधार पर ‘भेदभाव’ नहीं करते है .

सुभानी, जिन्हें गुरुवार को नियुक्त किया गया था और जो शनिवार को अपना कार्यभार ग्रहण किया है, वर्तमान में किसी भी राज्य के मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत एकमात्र मुस्लिम सिविल सर्वेंट हैं. इसके अलावा इस समय कोई भी मुस्लिम मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्यरत नहीं है.

1987 बैच की आईएएस टॉपर सुभानी बिहार के सीवान जिले के रहने वाले हैं. राज्य सरकार में उनके सहकर्मियों और साथियों के अनुसार, वह मुख्यमंत्री के सबसे करीबी नौकरशाह रहे हैं. ‘ईमानदार और प्रभावी’ अधिकारी के रूप में जाने जाने वाले, सुभानी 1990 के दशक के दौरान उस वक्त भोजपुर के जिला मजिस्ट्रेट थे, जब रणवीर सेना और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीआई एमएल) के बीच जातीय संघर्ष जोरो पर चल रहा था.

बिहार सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुभानी ने कुशलतापूर्वक इस नाजुक स्थिति को संभाला और आगे चलकर वे नीतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ राजनेताओं के करीबी बन गए.

इससे पहले सुभानी ने लगभग एक दशक (2009-2019) तक बिहार के गृह आयुक्त (प्रधान सचिव, गृह विभाग) के रूप में कार्य किया है. यह बिहार के गृह विभाग का नेतृत्व करने वाले किसी भी सिविल सेवक के लिए सबसे लंबा कार्यकाल था. इसी साल फरवरी में उन्हें विकास आयुक्त बनाया गया था.

सुभानी फ़िलहाल इस राज्य के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं.
जदयू के महासचिव के.सी. त्यागी ने कहा, ‘आमिर सुभानी जी राज्य के सबसे बेहतरीन अधिकारियों में से एक हैं, और उनके पास वरिष्ठता और अनुभव भी है. हालांकि, यह हमारे नेता नीतीश कुमार जी का एक महान निर्णय है और प्रतीकात्मक महत्त्व वाला भी है.

उन्होंने कहा, यह सभी के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि नीतीश कुमार कभी भी धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे.

त्यागी ने कहा कि सुभानी बिहार के पहले और किसी भी एनडीए शासित राज्य में एकमात्र मुस्लिम मुख्य सचिव हैं’.
वे कहते हैं, ‘इस तरह, यह शासन वाले हिस्से पर नीतीश कुमार की दृढ़ पकड़ के बारे में एक और संकेत है. उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि उनकी सरकार जाति और धर्म के आधार पर कभी विभाजित नहीं होगी.

राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नीतीश कुमार हमेशा यह सुनिश्चित करने के पक्ष में रहे हैं कि कोई मुस्लिम अधिकारी किसी-न-किसी महत्वपूर्ण पद पर हो.

इस अधिकारी ने कहा, आमिर सुभानी से पहले, मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में अफजल अमानुल्लाह थे. इसके अलावा, सुभानी सबसे कम विवादास्पद अधिकारी हैं. उनके खिलाफ कभी भी भ्रष्टाचार या किसी अन्य विवाद को लेकर कोई आरोप नहीं लगा है.

इस अधिकारी ने बताया कि सुभानी, जो अब विधुर हैं, उर्दू शायरी में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. उनकी पत्नी, जो एक डॉक्टर थीं, की करीब पांच साल पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी.

सुभानी की नियुक्ति के बारे में पूछे जाने पर, बिहार से तीन बार के भाजपा सांसद और पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख संजय जायसवाल ने कहा कि मुख्य सचिव की नियुक्ति करना मुख्यमंत्री का ‘विशेषाधिकार’ है.

उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि आमिर सुभानी साहब पदक्रम में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं और उन्हें एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता है. हमें इससे कोई दिक्कत नहीं हैं. मुख्यमंत्री अपने किसी भी अधिकारी को मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त कर सकते हैं. हमने कभी भी मुख्यमंत्री जी के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया और इसके बारे में अभी कोई आपत्ति भी नहीं की है.

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