उपचार की इजाजत की गुहार पर SC ने आसाराम की जमानत याचिका ख़ारिज ,राजस्थान सरकार को भेजा नोटिस

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उच्चतम न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की उत्तराखंड में हरिद्वार के निकट एक आयुर्वेदिक केंद्र में उपचार कराने की इजाजत के लिये याचिका पर शुक्रवार को राजस्थान सरकार से जवाब मांगा। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि वह इसके लिए आसाराम की सजा दो महीने निलंबित कर अंतरिम जमानत देने के पक्ष में नहीं है।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी करें (राजस्थान सरकार को)’’। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया। शीर्ष अदालत राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आसाराम की याचिका की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई कर रही थी।उच्च न्यायालय ने आसाराम को उनकी पंसद के चिकित्सा केंद्र में उपचार कराने के लिए सजा निलंबन की याचिका खारिज कर दी थी।

उल्लेखनीय है कि आसाराम को यौन उत्पीड़न के मामलों में उम्र कैद की सजा समेत विविध अवधि के कारावास की कई सजा मिली है याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘हम चिकित्सा के विशेषज्ञ नहीं हैं।’’ पीठ ने कहा कि वह सजा निलंबन पर विचार नहीं करेगी बल्कि आसाराम को उत्तराखंड के एक केंद्र में उपचार कराने की इजाजत देने के बाबत राज्य का रूख जानना चाहेगी। न्यायालय ने कहा, ‘‘हम सरकार से कहेंगे कि वह उन्हें वहां (केंद्र में) भर्ती कराए।’’

आसाराम के वकील ने बताया कि वह उत्तराखंड में हरिद्वार तथा ऋषिकेष के बीच स्थित प्रकाश दीप इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद में उपचार कराना चाहते हैं।जोधपुर की एक अदालत ने 25 अप्रैल, 2018 को आसाराम को 2013 में अपने आश्रम में एक किशोरी से बलात्त्कार का दोषी पाया था और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने आसाराम के सहयोगी शरद और शिल्पी को भी इसी मामले में उनकी भूमिका के लिये 20-20 साल की कैद की सजा सुनाई थी।

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