मुसलमानों के खिलाफ इतनी नफरत फैलाई गई कि आज हिंदू नौजवान नफरत से भरकर भाजपा के समर्थक बन गए :हिमांशु कुमार

कोलंबस ईसाई था लेकिन अमेरिका पर उसके द्वारा कब्जा किए जाने और अमेरिका के मूल निवासियों के कत्ल को ईसाईयों का हमला और ईसाइयों द्वारा किए गए कत्ल नहीं कहा जाता

भारत में अंग्रेज आए डच आए पुर्तगाली आए फ्रांसीसी आए लेकिन हमने कभी नहीं कहा कि भारत पर ईसाइयों ने राज किया है

लेकिन मुगलों के भारत आने भारत में शासन करने को हम मुसलमानों का हिंदुओं पर आक्रमण और मुसलमानों द्वारा हिंदुओं पर पर लादी गई गुलामी कहते हैं

हालांकि भारत में मुगलों ने भक्ति काल को संरक्षण दिया उन्हीं के समय में सूरदास तुलसी मीरा रहीम रैदास और सारे भक्त कवि हुए

कृष्ण का पूरा बाल चरित्र उसी समय में विकसित हुआ

अयोध्या के 400 राम मंदिर मुगलों के समय में ही बने

रामचरितमानस मुगलों के समय में लिखी गई

बहरहाल हमारा आज का विचार का मुद्दा यह है कि क्या वह मुसलमानी शासन था

क्या आज के मुसलमान मुगल है

भारत में हमारे आसपास जो मुसलमान रहते हैं वे ज्यादातर भारत के ही तथाकथित छोटी जातियों से मुसलमान बने हुए लोग हैं

भारत में जातिगत शोषण भेदभाव और छुआछूत से बचकर बराबरी की खोज में बड़ी संख्या में लोगों ने इस्लाम अपनाया

1857 के गदर में मुसलमानों ने बहुत बड़ी संख्या में भाग लिया और अंग्रेजों को परेशान किया

1857 के बाद जिन हिंदुस्तानियों को फांसी दी गई उसमें ज्यादा संख्या मुसलमानों की थी

अंग्रेजों ने मुसलमानों को बुरी तरह बर्बाद किया

उसके बाद बहुत सारे मुस्लिम नेताओं ने अंग्रेजों को यह विश्वास दिलाया कि वे कांग्रेस के साथ नहीं जुड़ेंगे और पढ़ाई लिखाई पर ध्यान देंगे

मुस्लिम लीग की स्थापना इसीलिए हुई जिसमें अंग्रेजों ने मदद भी करी थी

कांग्रेस तब तक रेडिकल होना शुरू हो गई थी और उसमें समाजवाद और बराबरी के विचार आने लगे थे

जो जमीदार और बड़ी जातियों के लोग थे उन्हें लगने लगा था कि आगे चलकर कांग्रेस में हमारे हित सुरक्षित नहीं रहेंगे

परंपरागत शासक वर्ग के हिंदुओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू महासभा का गठन कर लिया और कांग्रेस से अलग हो गए मुस्लिम जमीदारों ने मुस्लिम लीग को समर्थन दिया

यह तय हो गया था कि आजादी के बाद पाकिस्तान में जमीदारियां खत्म नहीं करी जायेंगी

याद रखिए भारत में आजादी के बाद सबसे पहला कानून जमीदारी उन्मूलन अधिनियम लागू हुआ था

लेकिन पाकिस्तान में आज तक जमीदारी का उन्मूलन नहीं हुआ

आज मैंने मधु लिमये का एक लेख शेयर किया है जिसमें मधु लिमये ने बताया है कि भारत में जमींदारी उन्मूलन का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गुरु गोलवलकर ने बहुत विरोध किया था

यानी विचारधारा के स्तर पर मुस्लिम लीग और आर एस एस एक ही लेवल पर हैं

वैसे भी हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने मिलकर भारत में सरकारें बनाई और जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी मुस्लिम लीग समर्थित सरकार में मंत्री रहे

और यह दोनों ही कांग्रेस के विरोध में थे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत छोड़ो आंदोलन के समय अंग्रेजों का साथ दिया था

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अंग्रेजों को बताया था कि कैसे वह भारत छोड़ो आंदोलन को कुचल सकती है

इन सब बातों के सबूत मौजूद हैं

मैं इसलिए बता सकता हूं कि मेरे परिवार के कई लोग उस समय की आजादी की लड़ाई में शामिल थे मेरे पिता खुद भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल थे

चिंता की बात यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पिछले 100 सालों में हमारे इतिहास को पूरी तरह से तोड़ मरोड़ दिया है

मुसलमानों के खिलाफ जमकर नफरत फैलाई गई है झूठ फैलाया गया है

उसका नतीजा यह हुआ है कि आज भारत के हिंदू नौजवान नफरत से भरकर भारतीय जनता पार्टी के समर्थक बन गए हैं और आज यह पार्टी पूरी तरह सत्ता पर काबिज हो गई है

भारतीय जनता पार्टी का सत्ता पर कब्जा कोई आम तरीके से अन्य पार्टियों जैसा सरकार पर कब्जा नहीं है

भारतीय जनता पार्टी द्वारा कब्जा सम्पूर्ण है

भारतीय जनता पार्टी के कब्जे में आज भारत की सेना है सुप्रीम कोर्ट है चुनाव आयोग है विश्वविद्यालय हैं पुलिस है उद्योगपति हैं रिजर्व बैंक है

पहले यह सभी संस्थाएं स्वतंत्र रूप से जिंदा थी और सरकार को इन सब का ख्याल रख कर प्रशासन चलाना होता था

आज यह सारी संस्थाएं सरकार के इशारे पर काम करती हैं

चिंता की बात यह है कि सरकार अब 2 लोगों द्वारा चलाई जा रही है

अब मंत्रिमंडल बेकार है संसद बेकाम है

भारत एक बहुत बड़ी मुसीबत में है

सीमा के चारों तरफ जो देश हैं उन्हें हमने अपना दुश्मन बना लिया है

चीन हमारी सीमा में घुस रहा है

देश के भीतर छात्र नेताओं को जेलों में डाल दिया गया है बुद्धिजीवियों को जेल में डाल दिया गया है

उद्योग धंधे समाप्त हो गए हैं बेरोजगारी फैल गई है शिक्षक ठप है अर्थव्यवस्था चौपट है

ऐसे समय में ही सरकारें अपने विरोध में उठने वाली आवाजों को बुरी तरह कुचलना शुरू करती है

यह एक चिंता पूर्ण समय तो है लेकिन इसे चुनौती के तरह लिया जाना चाहिए

हमें गिरफ्तार होने मारे जाने से नहीं डरना चाहिए

इन ताकतों का जमकर विरोध और इन्हें हटा कर सत्य और न्याय की स्थापना के लिए कोशिशों को बढ़ाना चाहिए

सड़क पर आंदोलन करने की जरूरत है और जैसे ही उसके लिए परिस्थितियां बनेंगी वह शुरू हो जाएगा

लेखक :हिमांशु कुमार

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