सैनिकों को वन पेंशन तो याद होगा, क्या एक साल और चलेगा किसान आंदोलन ! : रवीश कुमार

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किसान ही नहीं सैनिकों के साथ भी मोदी सरकार का यही ट्रैक रिकार्ड है। सितंबर 2013 में हरियाणा के रेवाड़ी में पूर्व सैनिकों की रैली हुई थी। उसमें नरेंद्र मोदी ने वन रैंक वन पेंशन का वादा कर दिया। जब सरकार बनी तो किनारा करने लगे। पूर्व सैनिक अधिकारियों ने सरकार को घेर लिया। जंतर मंतर पर लंबा धरना चला। सरकार कतराने लगी। उस समय भी उसी मीडिया ने जो सैनिकों के नाम पर देशप्रेम की दुकान चला रहा था, आंदोलन करने वाले सैनिकों को ठीक से कवर तक नहीं किया। अब तो याद नहीं कि तब सैनिकों को क्या क्या कहा गया था लेकिन उन्हें जस का तस छोड़ दिया गया।
जंतर मंतर पर 15 जून 2015 से धरना शुरू हुआ। सैनिकों ने अपना घर ही बना लिया। आंदोलन को लेकर सैनिकों को बाँटने की भी ख़बरें पढ़ने को मिलीं। 146 दिनों के धरने के बाद सरकार ने नवंबर 2015 में वन रैंक वन पेंशन लागू किया। सैनिक इससे संतुष्ट नहीं हुए और सुप्रीम कोर्ट चले गए। सैनिक अफ़सरों के संगठन के नेता रिटायर्ड मेजर जनरल सतबीर सिंह का कहना है कि उनका आंदोलन आज भी जारी है। 2357 दिन हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के कहने के बाद भी सरकार ने सैनिकों से बात नहीं की और यह मामला कोर्ट में है। अगर यह सही है, जो कि होगा ही तो यह सरकार सैनिकों से भी बात नहीं करती है। किसानों से क्या बात करेगी।

हमने तो 146 दिनों की भूख हड़ताल की बात कही थी लेकिन शो के बाद सेना के पूर्व अधिकारी की जीवनसाथी का एक मैसेज आया। हमारे सहयोगी कर्मवीर को भेजे इस मैसेज से पता चलता है कि उन्होंने 800 से अधिक दिनों की हड़ताल की थी।

कर्मवीर जी राम राम आपका और आपके एनडीटीवी चैनल का बहुत बहुत धन्यवाद करतीं हूँ। जो हमेशा सच का साथ देता है , और रविश कुमार जी की तो जितनी तारीफ की जाए वो कम है, रविश जी ने वन रैंक वन पैंशन और किसान आंदोलन को बहुत अच्छे तरीके से जनता के सामने रखा, इसलिए रविश कुमार जी का तहेदिल से धन्यवाद करतीं हूँ, मैंने भी वन रैंक वन पैंशन के लिए 810 दिन लगातार भूखहड़ताल की जिसमें एक टाईम खाना खाती थी, और 11 दिन आमरण अनशन किया और बहोश हो गई, चार दिन आईसीयू में रखा , और अभी एक साल से टिकरी बोर्डर पर किसानों के साथ संघर्ष कर रहीं हूँ।

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