सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सदस्यों की असलियत .चार में से तीन पहले ही सरकार के पक्ष में अपनी राय जाहिर कर चुके हैं

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सदस्यों की असलियत जानिए
अपनी जगह से एक इंच भी मत हिलना किसान भाइयों !
सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई है उसके बारे में आपकी सोच बिल्कुल ठीक है ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जिस कमेटी का गठन किया है. उसके चार में से तीन सदस्य पहले से ही कृषि कानूनों के बारे सरकार के पक्ष में अपनी राय जाहिर कर चुके हैं
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी में भूपिंदर मान सिंह मान, प्रेसिडेंट, अशोक गुलाटी एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट,
डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, इंटरनेशनल पॉलिसी हेड, और अनिल धनवत, शेतकरी संगठन, महाराष्ट्र को शामिल किया गया है.
इसमे भूपिंदर मान सिंह मान बयोवृद्ध किसान नेता है पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं वे कुछ दिनों पहले तक कानूनों के खिलाफ अपनी राय रख रहे थे लेकिन मित्र पत्रकार सुमित कुमार दुबे बतला रहे हैं कि वह भी अब कुछ संशोधनो के साथ इन कानूनों को लागू करने पर सहमत हो गए हैं
उनके अलावा जो तीनों सदस्य है वो तो बिल्कुल सरकारी पिठ्ठू है
अशोक गुलाटी तो पिछले दिनों इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख में कह चुके हैं कि ‘इन कानूनों से किसानों को अपने उत्पाद बेचने के मामले में और खरीदारों को खरीदने और भंडारण करने के मामले में ज्यादा विकल्प और आजादी हासिल होगी. इस तरह खेतिहर उत्पादों की बाजार-व्यवस्था के भीतर प्रतिस्पर्धा कायम होगी. इस प्रतिस्पर्धा से खेतिहर उत्पादों के मामले में ज्यादा कारगर मूल्य-ऋंखला (वैल्यू चेन) तैयार करने में मदद मिलेगी क्योंकि मार्केटिंग की लागत कम होगी, उपज को बेहतर कीमत पर बेचने के अवसर होंगे, उपज पर किसानों का औसत लाभ बढ़ेगा और साथ ही उपभोक्ता के लिए भी सहूलियत होगी, उसे कम कीमत अदा करनी पड़ेगी. इससे भंडारण के मामले में निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा तो कृषि-उपज की बरबादी कम होगी और समय-समय पर कीमतों में जो उतार-चढ़ाव होते रहता है, उसपर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.’
कमेटी के दूसरे सदस्य डॉ. प्रमोद कुमार जोशी के बारे में ज्यादा मालूमात तो नही चल रही है लेकिन वे कारपोरेट के आदमी दिख रहे हैं उनकी जितनी नियुक्तियां है वे दिखा रही है उनकी सोच क्या होगी व SAARC Agricultural Centre’s governing board में चेयरमैन रहे हैं
Bangladesh and UN-CAPSA governing board in Bogor में तथा intergovernmental panel on the World Bank’s International Assessment of Agricultural Science and में भी वह मेम्बर रहे हैं Technology for Development; International Steering Committee for the Climate Change, Agriculture and
Food Security Challenge Program of CGIAR से भी वह जुड़े हुए हैं इसलिए आप समझ ही सकते हो कि उनकी सोच क्या होगी
चौथे सदस्य को तो आप पहचानते ही हो…. यह है अनिल धनवत, शेतकरी संगठन, महाराष्ट्र से……
शेतकरी संगठन और इसके अध्यक्ष तो बिलकुल खुला समर्थन सरकार के तीनों कृषि कानूनों को दे चुके हैं जब आप सड़को पर बैठकर इसका विरोध कर रहे थे तो शेतकरी संगठन वाले कृषि क़ानूनों के समर्थन में रैलियाँ आयोजित कर रहे थे पटाखे फोड़। रहे थे ओर इसे जश्न के तौर पर मना रहे थे
शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवत इन बिलो को बड़ा सुधार बता चुके ओर कह रहे हैं कि इससे किसानों को वित्तीय आजादी मिलेगी. घनवत ने पिछले दिनों ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा है कि उनके कृषि संगठन ने बिल का समर्थन करने का निर्णय लिया है क्योंकि इन बिलों से किसानों को मदद मिलेगी.
साफ साफ दिख रहा है कि इस कमेटी की मंशा क्या है और ऐसी कमेटी बनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की मंशा क्या है…..इसलिए आप तो डटे रहो……..पीछे मत हटना हम सब आपके साथ है…….
girish.malviya
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