अंग्रेज भारत को लूटने के लिए रेल लाये थे ,और हमारे वाले देश को लूटने के लिए रेल बेच रहे हैं

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हे रेल वाले श्रीमान मंत्री जी, आदर सहित नमस्ते!         मैं  आपको बताना चाहता हूं कि आप रेल के जरिये जनता को जितना रेल रहे हैं, वो बहुत कम है। मैं देशहित में आपको जंतर देना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि जब कोई नागरिक टिकट बुक करके कैंसिल करे तो आप सिर्फ 60,70 या 80 प्रतिशत राशि ही ना काटें। आप उसकी किडनी निकाल लें। आपने सुना होगा कि देश के तमाम गरीब मजदूर कई बार पैसे के लिए अपनी एक किडनी बेच देते हैं। कई बार कुछ अस्पताल मरीजों की किडनी निकाल कर बेच देते हैं। सुना है किडनी काफी महंगी बिकती है। आपकी बहुत कमाई होगी। रेल पर चढ़ने वाले हर नागरिक की एक-एक किडनी निकाल कर बेच दें।

मेरे पास और भी बहुत सारे आइडियाज हैं जिनसे आपकी बहुत कमाई हो सकती है। संपत्ति जब्त करने वाला योगी जी का फॉर्मूला भी आजमाया जा सकता है। जो नागरिक एक बार ट्रेन पर चढ़े, उसकी पूरी संपत्ति जब्त कर लें। जो टिकट बुक करके कैंसिल करे, उसकी आधी, जो ट्रेन के बारे में सोचे उसकी एक तिहाई और जो जाती हुई ट्रेन का दीदार कर ले उसकी एक चौथाई संपत्ति जब्त कर लें। सीधा आदमी भी जब्त करने पर विचार किया जा सकता है।
आप चाहें तो ट्रेन पर यात्रा करने के बदले लोगों का कुछ लीटर खून निकलवा सकते हैं। यात्री जिस स्टेशन पर उतरे, बाहर निकलने से पहले उसे जिबह कर दिया जाए। नकद कमाई का एक और तरीका ये हो सकता है कि यात्रा करने वालों का बैंक अकाउंट जब्त कर लें। लेकिन इससे गरीब जनता से कुछ मिल पाने की संभावना कम हो जाएगी। गरीबों के पास बैंक बैलेंस नहीं होता। इसलिए ये आइडिया कम अच्छा है। आप शरीर के दूसरे अंग भी निकाल सकते हैं।
ऐसा करना चाहिए कि एक ‘रेलयात्री लूटो कमेटी’ बना दी जाए जो ये विचार करके बताए कि रेलयात्रा करने वाले नागरिकों को किस तरह, कितना और किस प्रकार लूटना है। इस तरह एक नया रिकॉर्ड बनेगा। आप दुनिया की पहली लूट कमेटी बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
आपका रेलवे दुनिया का अकेला ऐसा संस्थान है जो बिना सर्विस दिए ही पैसा वसूल लेता है। टिकट एप से बुक हुआ, कोई मैनपावर भी इस्तेमाल नहीं हुआ, बावजूद इसके हर कैंसिल टिकट का दो तिहाई तक हिस्सा काट लेने का तर्क अभी दुनिया में पैदा नहीं हो सका है। मेरे इन सुझावों पर अमल करके आप नए तर्क पैदा करने का श्रेय भी पा जाएंगे।
कमाई बढ़ाइए, रेल के बारे में सोचने पर भी शुल्क लगाइए। अगर कोई आदमी रेल के बारे में सोच ले तो उसकी एक महीने पूरी कमाई जब्त कर लीजिए। कोई रेल सपने में देख ले तो उसकी आंखें निकाल लीजिए।
आपका मकसद होना चाहिए कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा की खटिया खड़ी करके बिस्तरा गोल कर दें। भारत के नागरिक आजकल नशे में हैं। उनका मानना है कि जितना ज्यादा अत्याचार, उतनी ही बेहतरीन सरकार। मसलन आपकी माइनस अर्थव्यवस्था वाली सरकार को ही देखिए, कितनी लोकप्रिय है! अखंड और अनन्त लोकप्रिय। फिर भी जनता पर जुल्म की मात्रा काफी कम है। इसे और बढ़ाइए और कमाई के तरह तरह के आइडियाज पर अमल कीजिए।
आप ये ध्यान रखें कि सरकार बहुत पावरफुल होती है। उसे पिछले दरवाजे से चोरी करने की जरूरत नहीं है। सीधा डकैती डालना ज्यादा मुफीद होगा। आपका मकसद कमाई है तो लुच्चा टाइप का बनिया क्यों बनना? आप दबंग टाइप के डकैत बनिए। दिल खोलकर और खुलकर, डंके की चोट पर लूटिए। इससे दुनिया में आपकी भी ख्याति डंकापति के रूप में होने की प्रबल संभावना होगी।
इतिहास की किताबें कहती हैं कि अंग्रेज बहादुर भारत को लूटने के लिए रेल लाये थे। लूट आसान हो गई थी। वो तो हम जुगाड़प्रिय भारतीयों ने उसे अपने परिवहन की रीढ़ बना ली। बुरा हुआ। आप रेल को लूट का जरिया बनाइये और बहुत पैसा कमाइए।
सादर
और ज्यादा लुटने के लिए आतुर
आपका एक अनवरत लुटा हुआ नागरिक

पत्रकार कृष्ण कांत के वाल से

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