बहरूपिये की तरह अनुच्छेद 370 का नाम बदला जा सकता है, रूप बदला जा सकता है, चेहरा भी बदला जा सकता है,

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बहरूपिये की तरह अनुच्छेद 370 का नाम बदला जा सकता है, रूप बदला जा सकता है, चेहरा भी बदला जा सकता है,

जब तक कश्मीर समस्या का सम्पूर्ण समाधान नहीं हो जाता, तब तक नरेंद्र भाई मोदी जी को ही भारत का प्रधानमंत्री रहना चाहिए।
कश्मीर समस्या का सम्पूर्ण समाधान ये है कि अनुच्छेद 370 फिर से वापस किया जाए और ये बात नोट कर लीजिए कि आज नहीं तो कल, कश्मीर समस्या का यही अंतिम समाधान होना है।
हां, अनुच्छेद 370 का नाम बदला जा सकता है, रूप बदला जा सकता है, चेहरा बदला जा सकता है, लेकिन इसकी वापसी के अलावा और कोई रास्ता हमारे पास है नहीं।
क्यों? इसलिए कि आज कश्मीर में जितने सुरक्षा बल तैनात हैं, उतने अनंतकाल तक तैनात नहीं रखे जा सकते, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसका नोटिस लिए बिना नहीं मानेगा।
फिलहाल चार नागरिकों पर एक का औसत है। यानी कश्मीर के चार लोगों पर एक सिपाही तैनात है।
हम नमस्ते ट्रम्प और हाउडी मोदी जैसी रिश्वत देकर अमेरिका को इस मामले में लंबे समय तक चुप नहीं रख सकते।
कश्मीर पर मुंह बंद रखवाने के लिए दुनिया के तमाम देशों के साथ और भी तरह तरह के समझौते किए गए होंगे, जिनका इस देश को शायद ही कभी पता चले।
किस देश के सामने किस स्टाइल में और कब कब घुटने टेके गए होंगे, कौन जाने। विदेशी सांसदों के दलों को बुलाना और कश्मीर घुमाना, ये संयोग नहीं, प्रयोग था, जो दो बार हो चुका है।
लेकिन ये सब धतकरम बार बार नहीं किए कराए जा सकते।
अब तक यह बात भी सरकार की समझ में आ चुकी है कि सुरक्षा बलों को वापस बुलाने से जो उपद्रव घाटी में होगा, उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा, सो एक तरफ कतर में तालिबानी आतंकवादियों से बात हो रही है और दूसरी तरफ फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को मक्खन लगाया जा रहा है।
प्यारे भगतजनो, दिल थामकर तमाशा देखते रहो, अभी तो ये शुरू हुआ है, आगे बहुत कुछ होना है।
अगर 370 की वापसी भाजपा की सत्ता से विदाई के बाद हुई तो आरएसएस के लोगों के हाथ समाज में जहर फैलाने का एक और मसाला लग जाएगा।
हम चाहते हैं कि ये काम मोदी के कार्यकाल में ही हो, ताकि बाद में कहने सुनने के लिए कुछ न बचे।
#हरिबोल

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