उस्मानी सल्तनत की तरह अफगानिस्तान के लिए OIC बनाए मुस्लिम देशों की शांति सेना

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अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच बुधवार को अनादोलु एजेंसी के प्रधान संपादक ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से मुस्लिम देशों की एक शांति सेना का गठन किया जाना चाहिए।

अफगानिस्तान में संघर्ष की गतिशीलता और तुर्की की भूमिका को लेकर Mehmet Öztürk ने कहा कि तुर्की इस क्षेत्र को अच्छी तरह से जानता है, शांति मिशन में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की ताकत स्थापित करने में विफलता अफगानिस्तान में एक अराजक गृहयुद्ध का कारण बन सकती है जहां सभी सभी लड़ रहे होंगे।

इस क्षेत्र के साथ तुर्की के संबंधों को मजबूत और ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक अफगान सेना की स्थापना ओटोमन साम्राज्य ने की थी।……

उन्होंने कहा कि 2002 में अफगानिस्तान में नाटो के हस्तक्षेप के दौरान तुर्की ने लड़ाकू बल नहीं भेजे थे, उन्होंने कहा कि इसने केवल देश के पुनर्निर्माण में भाग लिया। इस अवधि के दौरान, तालिबान ने तुर्की सैनिकों पर हमला नहीं किया।

उन्होंने कहा कि तालिबान के तुर्की में शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार करने से अफगानिस्तान को भी काफी नुकसान हुआ है। इस्तांबुल में बहुप्रतीक्षित अफगान शांति सम्मेलन अप्रैल के अंत में निर्धारित किया गया था, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया था। उन्होने कहा, कुछ समूह और राज्य नहीं चाहते थे कि तालिबान इस्तांबुल आए।……….

Mehmet Öztürk ने कहा , तुर्की को नाटो के हिस्से के रूप में अफगानिस्तान में नहीं रहना चाहिए….. यह कहते हुए कि यह तुर्की के लिए असुविधाजनक हो सकता है। तालिबान को विश्वास में लेने के साथ तुर्की को अफगानिस्तान में रहना चाहिए…. उन्होंने कहा, तालिबान भी तुर्की के साथ संघर्ष नहीं चाहता है।

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