बंगाल में आज मनाया जा रहा ,खेला होबे दिवस, ममता का क्या है प्लान!

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बंगाल में आज खेला होबे दिवस मनाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले महीने हर साल 16 अगस्त के दिन को ‘खेला होबे दिवस’ के तौर पर मनाने की घोषणा की थी. आज के दिन ममता एक लाख से ज्यादा फुटबॉल बांटेंगी.

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने ‘खेला होबे’ का नारा दिया था. उसके बाद से ही ये नारा देशभर में चर्चित हो गया है. कुछ दिन पहले ममता बनर्जी ने कहा था, खेला होबे समूचे देश में लोकप्रिय हो चुका है. आज सारा देश खेला होबे बोल रहा है. दिल्ली में भी खेला होबे बोला जा रहा है. ऐसे में हमें इस नाम को और आगे ले जाना होगा और इसे अमर बनाना होगा.

लेकिन खेला होबे दिवस क्यों मनाया जा रहा है? आखिर ममता का प्लान क्या है! आइए समझते हैं.

क्यों मनाया जा रहा है खेला होबे दिवस?

दरअसल, 40 साल पहले 16 अगस्त 1970 को बंगाल में एक फुटबॉल मैच के दौरान कई लोग मारे गए थे. उन्हीं की याद में ममता बनर्जी ने हर साल 16 अगस्त को खेला होबे दिवस मनाने का ऐलान किया है. सोमवार को बंगाल के कई क्लब में 1 लाख फुटबॉल बांटी जाएंगी.

ममता बनर्जी का क्या है प्लान?

भाजपा के आक्रामक कैंपेन के बावजूद ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की. ममता बनर्जी तीसरी बार मुख्यमंत्री बन गईं. इसके बाद से ही उनका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है. अब ममता बंगाल के बाहर भी राजनीति करना चाहती हैं.

TMC से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि ममता की नजर अब उन राज्यों में है जहां वो अपनी पार्टी को मजबूत कर सकती हैं. सूत्र बताते हैं कि वो नहीं चाहते कि चुनावों में 100 उम्मीदवार उतरे और उनमें से दो ही जीतकर आए. ममता का अब एक ही मकसद है या तो जीतना या फिर मुख्य विपक्षी पार्टी बनना.

क्या 2024 की तैयारी कर रहीं हैं ममता!

ममता बनर्जी ने पिछले महीने ही दिल्ली का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने सोनिया गांधी से लेकर तमाम विपक्षी नेताओं से मुलाकात की थी. माना जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ममता बीजेपी के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने की तैयारी कर रहीं हैं, ताकि बीजेपी को रोका जा सके.

ममता की नजरें अब दिल्ली के सिंहासन पर हैं और अब वो पूरे देश में ‘खेला’ करने की जुगत में हैं. ममता बनर्जी भले ही खुले तौर पर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को मानने से कतरा रहीं हों, लेकिन तीन महीने पहले विधानसभा चुनावों में मिली जीत ने उन्हें बीजेपी को राष्ट्रीय राजनीति में हराने की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित किया है.

पिछले महीने जब ममता दिल्ली गई थीं, तभी से ऐसी चर्चा है कि वो एक संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहीं हैं. जब उनसे पूछा गया था कि क्या एकजुट विपक्ष तख्तापलट कर सकता है, तो उन्होंने कहा था, “अगर आप सीरियस हैं तो 6 महीने में नतीजे दिखा सकते हैं.” उन्होंने कहा था एक ऐसा मंच होना चाहिए जहां सब साथ मिलकर काम कर सकें.

पिछले महीने 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ के दिन ममता बनर्जी ने गुजरात समेत कई राज्यों में कार्यक्रम रखा था. इस दौरान जगह-जगह पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ममता ने रैली की थी. इसे भी इस बात से जोड़कर देखा जा रहा है कि ममता अब पूरे देश में ‘खेला’ करने की तैयारी में जुट गई हैं.

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