क्रिप्टोकरेंसी विधेयक क्या है, सरकार को क्यों पड़ रही इसे लाने जरूरत!

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नई दिल्लीः मोदी सरकार ने घोषणा की है कि वह क्रिप्टोकरेंसी पर विधेयक लेकर आएगी। सरकार ने कहा है कि कि वो भारत में सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने जा रही और वह खुद की एक आधिकारिक क्रिप्टोकरेंसी लाएगी।

इसके लिए सरकार एक विधेयक लेकर आएगी जो सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश हो सकता है। यह खबर सुनते ही क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में मची हलचल अब भी जारी है। लगभग बड़े क्रिप्टोकरेंसी में 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। और अनुमान है कि करीब 10 करोड़ क्रिप्टो निवेशक इस घोषणा से घबरा गए हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबकि, देश की लगभग आठ फीसदी आबाद ने कई तरह की डिजिटल मुद्राओं में निवेश किया हुआ है। ऐसे में अगर सरकार डिजिटल मुद्रा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाती है तो इन निवेशकों को तगड़ा झटका लगेगा। इन निवेशकों ने करीब 70 हजार करोड़ रुपये वर्तमान में दुनियाभर में प्रचलित कई तरह की डिजिटल करेंसी में लगाए हुए है।

वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार की मंशा साफ कर दी है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि देश में क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी दशा में लीगल टेंडर नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि लेनदेन में इस करेंसी का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। वित्त सचिव के अनुसार, संसद में क्रिप्टो बिल पेश करने से पहले काफी अध्ययन किया जा रहा है।
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यह एक डिजिटल करेंसी होती है, जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है। इसे आप देख या छू नहीं सकते। यह छुपा हुआ होता है। लीमन ब्रदर्स कांड के बाद 2008 में इस आभासी करेंसी का उदय हुआ है। इस करेंसी में कोडिंग तकनीक का प्रयोग होता है। यह कंप्यूटर एल्गोरिद्म पर बनी हुई है। इसका कोई रेगुलेटर नहीं और कोई क्रिप्टोकरेंसी को कंट्रोल नहीं करता।

इस तकनीक के जरिए करेंसी के लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा होता है, जिसे हैक करना बहुत मुश्किल माना जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी का जाल लगातार बिछ रहा है। बिटकॉइन की कीमत में पिछले 11 साल में एक लाख गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं कुछेक क्रिप्टो करेंसी में पिछले एक साल में ही 10 हजार गुना तक का फायदा मिला है। डिजिटल करेंसी का अध्ययन करने वाली एक संस्था के अनुसार, अप्रैल 2020 में भारतीयों ने इसमें 92 करोड़ डॉलर का निवेश किया था, जो इस साल मई में बढ़कर 6.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

सरकार क्रिप्टोकरेंसी के नियम को मजबूत बनाने के लिए जो विधेयक ला रही है उसका नाम है क्रिप्टोकरेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2021यह विधेयक 2019 में बने क्रिप्टोक्यूरेंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2019 से अलग है। जिसे कुछ साल पहले वित्त मंत्रालय के अर्थशास्त्र मामलों के विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सेबी और आरबीआई के प्रतिनिधियों वाली एक अंतर-मंत्रालयी समिति ने जिसकी सिफारिश की थी, लेकिन इसे संसद में नहीं पेश किया जा सका था। पुराने विधेयक में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद, होल्डिंग, बिक्री समेत क्रिप्टो-संबंधित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।

एक आकलन के मुताबिक क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की तस्करी और ऑनलाइन फिरौती वसूलने जैसे तमाम गैर-कानूनी कामों के लिए होने लगा है। विराग गुप्ता के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लोगों ने खुद ही नियामक और कानून बना लिए और देश की सार्वभौमिकता को चुनौती दी है। अगर इस परंपरा जारी रही तो हवाला, मटका, सट्टा, पोंजी स्कीम और खनिज माफिया के कारोबारी भी खुद ही अपने नियमन की व्यवस्था से अवैध आमदनी पर टैक्स देने लगेंगे और कहेंगे कि वे भी देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहे हैं।

वे कहते हैं क्रिप्टो पर कानून बनाने के अलावा, सरकार को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, आरबीआई अधिनियम, 1934 और भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में उचित सुरक्षा और कम से कम न्यायिक हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रावधान करने चाहिए।

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