रोज़े का क्या मकसद है ? और नबी पाक ﷺ ने रोजे को किस चीज़ के लिये ढाल बताया है ?

मुफ़्ती उसामा इदरीस नदवी के कलम से

नबी पाक ﷺ ने फरमाया الصِّيَامُ جُنَّةٌ रोज़ा ढाल है,जिस तरह जंग में जवान अपने दुश्मन के हमले को ढाल से रोकता है और अपनी जान बचाता है,इसी तरह रोज़ेदार शैतान के हमले को रोजे से रोकता है,और बचाव करता है,इसी लिये नबी करीम ﷺ ने उस शख्स को रोज़ा रखने का हुक्म दिया है जिसको नफ़सानी शहवत का गलबा हो और बुराई में मुब्तिला होने का अंदेशा हो लेकिन वो शादी के बाद बीवी के खर्चा बर्दाश्त नही कर सकता मेहर अदा नही कर सकता है ।

इसी लिये रोज़ा शैतान के लिये ज़हर है जो उसकी ताकत और ज़ोर को तोड़ देता है,और इंसानी ख्वाहिशात को तोड़ने का बेहतरीन तरीका है,क्योंकि खाने पीने से इंसान के अंदर मनोवैज्ञानिक इच्छाऐं जन्म लेती हैं,और मज़बूत होती हैं,और मनोवैज्ञानिक इच्छाएँ शैतान का घर होती हैं।

रोज़ा का मक़सद

रोज़ा का मक़सद मनोवैज्ञानिक इच्छाओं को तोड़ना और उनको कुचलना है,ताकि इच्छाओं पर अच्छे कामों को करने पर शक्ति मिले, और रोज़े का मक़सद और उसकी रूह का असल राज़ उस शक्ति को तोड़ना है कमज़ोर करना है जो इंसान को बुराई पर उभारने के लिये शैतानी माध्यम और तरीके हैं

रोज़ा नबी पाक ﷺ की हिजरत के दूसरे साल यानी सन 2 हिजरी में रोज़ा मुसलमानों पर फ़र्ज़ हुआ है,रोज़ा रमज़ान उल मुबारक के महीने में इस लिए फर्ज हुआ क्योंकि ये महीना क़ुरआन का महीना जिसमें क़ुरआन पाक नाज़िल हुआ है,इसी लिये ये महीना अल्लाह की रहमतों के नाज़िल होने का महीना है।

रमज़ान की सुन्नतें

  • देर से सेहरी खाना
  • सूरज डूबने के बाद इफ्तार करना
  • खजूर या पानी या किसी भी मीठी चीज से इफ्तार करना।
  • इफ्तार के समय दुआ करना,इफ्तार के समय रोज़ेदार की दुआ रद्द नही होती।
  • तहज्जुद की नमाज पढ़ना
  • ज़्यादा से ज़्यादा सदक़ा और खैरात करना
  • उमराह करना
  • रमज़ान के आखरी दस दिनों में ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह के ज़िक्र और अज़कार, इबादात करना।
  • शबे कदर को तलाश करना और उन रातों में ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करना।
  • रमज़ान के आखरी दस दिनों में एतकाफ करना।
Donate to JJP News
जेजेपी न्यूज़ को आपकी ज़रूरत है ,हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं,इसे जारी रखने के लिए जितना हो सके सहयोग करें.

Donate Now

अब हमारी ख़बरें पढ़ें यहाँ भी
loading...